संविधान पर हो रहे हमलों के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लें नागरिक : वेदप्रकाश विद्रोही

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“संविधान सर्वोच्च है, सत्ता नहीं” — 77वें गणतंत्र दिवस पर वेदप्रकाश विद्रोही का आह्वान, कहा: मोदी-भाजपा 12 वर्षों से लोकतंत्र को योजनाबद्ध ढंग से कमजोर कर देश को फासीवाद की ओर धकेल रही है

रेवाडी, 25 जनवरी 2026। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनसे संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष की शपथ लेने का आह्वान किया।

विद्रोही ने कहा कि लोकतंत्र किसी व्यक्ति, पार्टी या विचारधारा से नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता से चलता है। लेकिन पिछले 12 वर्षों में मोदी-भाजपा-संघ की सरकारें सुनियोजित ढंग से संविधान, संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक ढांचे पर लगातार चोट कर देश और प्रदेश को फासीवाद की ओर धकेल रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के दुरुपयोग के जरिए समाज में साम्प्रदायिकता फैलाकर लोगों को बांटने और नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि राज्यपाल पद का दुरुपयोग, ईडी, आईटी और सीबीआई जैसी एजेंसियों के माध्यम से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को डराकर जनादेश के विपरीत दलबदल और खरीद-फरोख्त के जरिए विभिन्न राज्यों में भाजपा सरकारें बनाई गईं, जो भारत के 76 वर्षों के गणतांत्रिक इतिहास में अभूतपूर्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतदाता के जनादेश का सम्मान नहीं होगा, तो लोकतंत्र बचेगा कैसे?

उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकता देने से संबंधित कानून में संशोधन कर मोदी-भाजपा-संघ सरकार ने संविधान के मूल ढांचे पर सीधा प्रहार करते हुए देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

आर्थिक हालात पर चिंता जताते हुए विद्रोही ने कहा कि सरकार के तुगलकी फैसलों और गलत नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था संकट में है। बेरोजगारी चरम पर है, किसान की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। चंद पूंजीपतियों की तिजोरियां भर रही हैं, जबकि आम आदमी की जेब पर योजनाबद्ध तरीके से डाका डाला जा रहा है।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्होंने आम नागरिकों से आह्वान किया कि वे देश, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लें और संघी फासीवाद के खिलाफ संगठित व कड़ा विरोध करें।

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Author: Bharat Sarathi

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