
हिसार | बसंत पंचमी – 2026 – वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब हिसार में बसंत पंचमी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, सांस्कृतिक गरिमा और उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। ज्ञान, विद्या, कला एवं संगीत की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती की आराधना तथा ऋतुराज बसंत के स्वागत के इस शुभ अवसर पर क्लब परिसर भक्ति, संगीत और काव्य के मधुर सुरों से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना “हे शारदे माँ…” से हुआ, जिसे डॉ. सत्य सावंत, श्रीमती वीना अग्रवाल, श्री कमलेश कुकरेजा, श्रीमती सुनीता बहल सहित अन्य सदस्यों ने सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सधा हुआ, गरिमामय एवं प्रभावशाली संचालन श्रीमती वीना अग्रवाल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर श्रीमती वीना अग्रवाल ने सभी को बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि माँ शारदे सभी के जीवन में शुभ विचार, सद्बुद्धि और सृजनशीलता का संचार करें। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है और यही विविधता हमें एकता, आपसी बंधुत्व और अमन का संदेश देती है, जिसे बसंत पंचमी जैसे पर्व और सशक्त करते हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. सत्य सावंत ने बसंत पंचमी एवं माँ सरस्वती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस तथा वागेश्वरी जयंती के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने माँ सरस्वती के वाहन हंस को नीर-क्षीर विवेक का प्रतीक बताते हुए वीणा के सात तारों, श्वेत वस्त्रों और पीले रंग के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व को सरल शब्दों में समझाया। साथ ही महाकवि कालिदास द्वारा बसंत को ‘नेत्र निर्वाण’ कहे जाने का उल्लेख करते हुए ऋतु के सौंदर्य और जीवनदायिनी ऊर्जा पर प्रकाश डाला।

इसके उपरांत रंगारंग संगीत एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
डॉ. आर. के. सैनी ने “पूर्वा सुहानी आई रे”, डॉ. सुनीता सुनेजा ने “जाए रे बसंती चुनर”, जबकि डॉ. अजीत कुकरेजा एवं डॉ. कमलेश कुकरेजा ने “चली चली रे पतंग” प्रस्तुत कर वातावरण को बसंती रंगों से सराबोर कर दिया।
श्रीमती राज गर्ग ने अपनी स्वरचित कविता “हवा हूँ, हवा हूँ मैं” से श्रोताओं को भावविभोर किया। योगेश सुनेजा ने “ओ बसंती पवन” गीत प्रस्तुत किया। वहीं श्रीमती राज रानी मल्हान एवं श्रीमती सुदेश गांधी की नृत्य प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा और उत्साह भर दिया।
श्री करतार सिंह ने “वादियाँ ये फ़िज़ाएँ” गीत की प्रभावशाली प्रस्तुति के साथ सर छोटूराम के सामाजिक योगदान को भी स्मरण किया। डॉ. आर. पी. एस. खरब ने हरियाणवी लोकगीत “गंगा जी तेरे खेत में…” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर श्री जगदीश बेनीवाल ने उनके जीवन पर आधारित रागिनी प्रस्तुत की। वहीं डॉ. आर. डी. शर्मा के “बहारों फूल बरसाओ” और श्री अजीत सिंह के “सरसों फूली, रंग बसंती बिखर रहा धरती पर” गीतों ने श्रोताओं की भरपूर तालियाँ बटोरीं।
समारोह के अंत में सभी सदस्यों ने बसंत पंचमी के संदेश—ज्ञान, सौहार्द, सृजनशीलता और नई ऊर्जा—को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। वानप्रस्थ में आयोजित यह समारोह वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय सहभागिता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक आनंद का सशक्त एवं प्रेरक उदाहरण बना।








