नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026: BRICS चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित यूथ एंड AI पॉलिसी लैब – केस स्टडी चैलेंज, जो कि AI इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-इवेंट है, को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि भारत की AI नीति “शासन-प्रधान, नागरिक-केंद्रित और विकासोन्मुख” है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दृष्टि से प्रेरित है।

राज्यसभा सांसद श्री कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि भारत अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर केवल संभावनाओं पर चर्चा नहीं कर रहा, बल्कि उसे कानून, सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और सुविचारित नीतिगत ढांचे के माध्यम से संस्थागत स्वरूप दे रहा है। यह दृष्टिकोण विश्वास, समावेशन और व्यापक जनहित पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नैतिक, समावेशी और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अनियंत्रित प्रयोगों के बजाय कानून, विश्वास और लोककल्याण पर आधारित AI मॉडल को अपनाया है।”
अपने संबोधन में श्री शर्मा ने भारत के AI इकोसिस्टम के तीन आधारभूत स्तंभों को रेखांकित किया।
पहला, डेटा पर सार्वजनिक विश्वास और कानूनी जवाबदेही, जिसे Digital Personal Data Protection Act, 2023 के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है। यह कानून डेटा उपयोग के लिए सूचित सहमति, उद्देश्य की स्पष्टता और दुरुपयोग के मामलों में उत्तरदायित्व तय करता है।

दूसरा, राष्ट्रीय क्षमता निर्माण, जिसके अंतर्गत IndiaAI Mission को ₹10,300 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ स्वीकृति दी गई है। इसके तहत उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग अवसंरचना विकसित कर स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और सार्वजनिक संस्थानों के लिए AI तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।
तीसरा, जनसंख्या-स्तर की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, जिसमें Aadhaar, UPI, DigiLocker और Ayushman Bharat Digital Mission जैसे प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। ये प्रणालियाँ नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के साथ बड़े पैमाने पर AI अनुप्रयोगों को संभव बनाती हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि भारत में AI का उपयोग अब ठोस और मापनीय सामाजिक परिणाम दे रहा है। डिजिटल स्वास्थ्य, भुगतान, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में AI आधारित समाधानों ने पहुंच बढ़ाई है और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाया है।
नमो शक्ति रथ: AI का मानवीय और जिम्मेदार अनुप्रयोग
अपने संबोधन में श्री कार्तिकेय शर्मा ने नमो शक्ति रथ पहल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना इस बात का व्यावहारिक उदाहरण है कि AI को सामाजिक संवेदनशीलता, संस्थागत जवाबदेही और मानवीय गरिमा के साथ कैसे लागू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि देश में स्तन कैंसर की देर से पहचान एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती रही है, जिसका मुख्य कारण दूरी, लागत और सामाजिक संकोच जैसे कारक हैं। नमो शक्ति रथ के माध्यम से AI-सक्षम, रेडिएशन-मुक्त और गैर-आक्रामक तकनीक का उपयोग कर महिलाओं तक प्रारंभिक जांच सेवाएं सीधे उनके गांवों और समुदायों में पहुंचाई जा रही हैं।
इस पहल की विशेषता यह है कि यह केवल जांच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संदिग्ध मामलों को सुव्यवस्थित रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ती है, ताकि समय पर उपचार सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यहां AI किसी अमूर्त तकनीकी अवधारणा के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी सक्षम प्रणाली के रूप में कार्य कर रहा है जो पहुंच बढ़ाती है, निर्णय में सहायता करती है और जीवन रक्षक परिणाम उत्पन्न करती है।
श्री शर्मा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” के दृष्टिकोण और सरकार की AI for All प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब है, जहां तकनीक का उपयोग सामाजिक वास्तविकताओं को समझते हुए जनकल्याण के लिए किया जा रहा है।
वैश्विक AI शासन पर बोलते हुए श्री शर्मा ने कहा कि Global South की भागीदारी के बिना AI के नियम और मानक तय नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि BRICS देश, जो विश्व की लगभग 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, वैश्विक AI विमर्श को संतुलित, न्यायपूर्ण और व्यावहारिक दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “यूथ एंड AI पॉलिसी लैब युवाओं को केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रखता, बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर देता है। यहां से निकलने वाली सिफारिशें राष्ट्रीय और वैश्विक AI नीति संवाद को दिशा देंगी।”
अपने संबोधन के समापन में श्री कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि भारत यह सिद्ध कर रहा है कि नैतिक, समावेशी और संप्रभु AI केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि एक लागू किया जा सकने वाला शासन मॉडल है।
उन्होंने कहा, “तकनीक क्षमता देती है, कानून विश्वास पैदा करता है, नीति दिशा तय करती है और मूल्य परिणाम निर्धारित करते हैं। भारत इस यात्रा में नेतृत्व करने और वैश्विक साझेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।”








