बुजुर्ग, विधवा व दिव्यांग पेंशन में 200 रुपये बढ़ोतरी सिर्फ घोषणा बनकर रह गई
लाडो लक्ष्मी योजना में शर्तों का जाल, 20 लाख की जगह केवल 8 लाख महिलाएं लाभान्वित
गरीब, शोषित और वंचित वर्गों के साथ छल, प्रचार ज्यादा काम कम : विद्रोही
रेवाडी, 22 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की कथनी और करनी में हमेशा से दिन-रात का अंतर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले हरियाणा की महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना के नाम पर ठगा गया और अब बुजुर्गों, विधवाओं व दिव्यांगों के साथ भी छल किया जा रहा है।
विद्रोही ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 1 नवंबर 2025 से बुढ़ापा, विधवा और दिव्यांग पेंशन में 200 रुपये मासिक वृद्धि कर इसे 3200 रुपये करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के अनुसार दिसंबर 2025 से बढ़ी हुई पेंशन मिलनी चाहिए थी, लेकिन न तो दिसंबर 2025 में और न ही जनवरी 2026 में लाभार्थियों को बढ़ी हुई राशि मिली। दोनों महीनों में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को केवल 3000 रुपये मासिक ही दिए गए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सम्मान भत्ता बढ़ाना ही नहीं था तो हरियाणा दिवस पर 1 नवंबर 2025 को बढ़ोतरी का ढोल क्यों पीटा गया।
विद्रोही ने कहा कि इसी तरह अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की सभी महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपये मासिक देने की घोषणा की थी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद योजना लागू करते समय शर्तों का जाल बिछा दिया गया। 18 वर्ष की बालिग महिलाओं को शामिल करने के बजाय न्यूनतम आयु 23 वर्ष तय कर दी गई और वार्षिक आय की सीमा एक लाख रुपये रख दी गई।
मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि इस योजना से 20 लाख महिलाएं लाभान्वित होंगी, लेकिन वास्तविकता में मात्र लगभग 8 लाख महिलाओं को ही लाभ मिला। बाद में योजना में बदलाव कर 1.80 लाख रुपये वार्षिक आय वाले परिवारों की कुछ महिलाओं को शामिल किया गया, वह भी तब जब उनके बच्चे 10वीं या 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाएं।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार गरीब, शोषित और वंचित वर्गों की वास्तविक मदद कम करती है, जबकि घोषणाओं और प्रचार का शोर अधिक करती है। बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों की पेंशन वृद्धि और लाडो लक्ष्मी योजना भाजपा की नीयत और नीतियों का जीवंत प्रमाण हैं।








