अहीरवाल में भाजपा की कथित अनुशासनहीनता बेनकाब, वर्चस्व की जंग चरम पर

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भाजपा में सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप भविष्य में बिखराव का संकेत, कांग्रेस एकजुट हुई तो सत्ता का महल ढहना तय : वेदप्रकाश विद्रोही

गुरुग्राम/रेवाड़ी/महेंद्रगढ़ | 14 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा है कि हरियाणा में कांग्रेस पर गुटबाजी और आपसी कलह का आरोप लगाने वाली भाजपा आज स्वयं गंभीर आंतरिक संघर्ष से जूझ रही है। विशेषकर अहीरवाल क्षेत्र में नए साल की शुरुआत से ही भाजपा में वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है, जो पार्टी के कथित अनुशासन की पोल खोल रही है।

विद्रोही ने कहा कि अहीर बाहुल्य तीनों जिलों—गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़—में भाजपा का आंतरिक घमासान चरम पर है। केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह, हरियाणा सरकार के मंत्री राव नरबीर सिंह, पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक अभय सिंह यादव तथा उनके समर्थक न केवल गुटबाजी कर रहे हैं, बल्कि जनसभाओं, साक्षात्कारों और प्रेस वार्ताओं के माध्यम से एक-दूसरे पर खुलेआम आरोप-प्रत्यारोप भी लगा रहे हैं। उनके समर्थक भी मैदान में उतरकर इस संघर्ष को और हवा दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जो भाजपा स्वयं को “अनुशासित पार्टी विद डिफरेंस” बताती है, उसी पार्टी में अहीरवाल के तीनों जिलों में सिर-फुटव्वल की स्थिति बनी हुई है। यह हालात न केवल भाजपा के अनुशासन को बेनकाब करते हैं, बल्कि भविष्य में पार्टी के संभावित बिखराव का संकेत भी देते हैं।

विद्रोही ने कहा कि कांग्रेस की कमजोरियों और गलत रणनीतियों के चलते भाजपा भले ही लगातार तीसरी बार हरियाणा की सत्ता पर काबिज हुई हो, लेकिन उसकी सत्ता अवसरवादी और दलबदलू नेताओं के सहारे टिकी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा से निर्वाचित भाजपा के पांच लोकसभा सांसदों में से तीन ऐसे नेता हैं, जिनका भाजपा-संघ की विचारधारा से कभी कोई वास्तविक जुड़ाव नहीं रहा। इसी प्रकार भाजपा के 48 विधायकों में से 25 से अधिक ऐसे हैं, जो पूर्व में कांग्रेस या लोकदल से जुड़े रहे हैं और परिस्थितियां बदलते ही पार्टी को आंख दिखाने में देर नहीं करेंगे।

विद्रोही ने अहीरवाल की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ओर राव इन्द्रजीत सिंह हैं, तो दूसरी ओर राव नरबीर सिंह और अभय सिंह यादव एकजुट होकर क्षेत्र में वर्चस्व की निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं। यह संघर्ष अहीरवाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हरियाणा में फैलना तय है। फरीदाबाद और पलवल में भाजपा का अंदरूनी संघर्ष पहले ही सार्वजनिक हो चुका है और आने वाले समय में चरखी दादरी, भिवानी और हिसार में भी इसके असर दिखाई देंगे।

उन्होंने कहा कि यदि हरियाणा में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं को दरकिनार कर एकजुट होकर ठोस रणनीति के साथ काम करें, तो भाजपा का ताश के पत्तों जैसा सत्ता का महल ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा। भाजपा की सत्ता बिखरेगी या नहीं, यह काफी हद तक कांग्रेस की रणनीति और उसके नेताओं के आचरण पर निर्भर करेगा।

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Author: Bharat Sarathi

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