श्रम विभाग में ₹1500 करोड़ का वर्क स्लिप घोटाला हरियाणा में BJP की ‘लगातार भ्रष्टाचार’ की नीति का जीवंत प्रमाण – दीपेन्द्र हुड्डा

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·        बीजेपी सरकार में बैठे लोगों की मिलीभगत घोटालेबाजों से, इसलिए सभी घोटालों की सीबीआई जांच कराई जाए – दीपेन्द्र हुड्डा

·        जब कैबिनेट मंत्री खुद घोटाले की बात स्वीकार कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री सीबीआई जांच कराने से क्यों पीछे भाग रहे– दीपेन्द्र हुड्डा

·        घोटालों के अपने ही रिकॉर्ड तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है भाजपा सरकार – दीपेन्द्र हुड्डा

·        11 साल से एक के बाद एक घोटाले कर रही बीजेपी सरकार ने लगातार घोटालेबाजों को बचाया, मामले को दबाया – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 30 दिसंबर। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि तीसरी बार सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार में ताबड़तोड़ घोटालों शुरू हो गये हैं। श्रम विभाग में ₹1500 करोड़ का वर्क स्लिप घोटाला हरियाणा में बीजेपी सरकार की ‘लगातार भ्रष्टाचार’ की नीति का जीवंत प्रमाण है। बीजेपी सरकार घोटालों के अपने ही रिकॉर्ड तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। बीजेपी सरकार में सम्बंधित विभाग के कैबिनेट मंत्री खुद भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराने कह रहे, लेकिन सरकार चुप्पी साधे बैठी है। 11 साल से एक के बाद एक घोटाले कर रही बीजेपी सरकार ने लगातार घोटालेबाजों को बचाया और मामले को दबाया है। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि हरियाणा में हुए सभी घोटालों की सीबीआई जांच कराई जाए क्योंकि घोटालेबाजों से बीजेपी सरकार में ऊपर बैठे लोगों की मिलीभगत है, ऐसे में किसी निष्पक्ष केन्द्रीय एजेंसी से जांच कराने से ही दूध का दूध, पानी का पानी होगा। 

खबरों के हवाले से उन्होंने कहा कि श्रम विभाग में डेढ़ हजार करोड़ रुपये का वर्क स्लिप घोटाले का भंडाफोड़ खुद सरकार में सम्बन्धित विभाग के कैबिनेट मंत्री ने किया है। जो इस बात का सबूत है कि प्रदेश में सरकार नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क चल रहा है। यह कोई मामूली घोटाला नहीं, बल्कि लाखों गरीब मेहनतकश मजदूरों के हक पर सरकारी संरक्षण में की गई खुली लूट है। खुलासे के अनुसार लाखों वर्क स्लिप और श्रमिक पंजीकरण फर्जी पाए गए, और करोड़ों रुपये उन लोगों की जेब में चले गए, जिनका मेहनत-मजदूरी से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। जब कैबिनेट मंत्री खुद घोटाले की बात स्वीकार कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री सीबीआई जांच कराने से क्यों पीछे भाग रहे हैं।  

उन्होंने कहा कि कर्मकार कल्याण बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति में,  निर्माण श्रमिकों को योजनाओं का लाभ देने  में भी गड़बड़ी  सामने आई।

इसके बाद हुई जांच में हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में जांच की गई, जहां काफी गड़बड़ियां मिलीं। 3 जिलों में कुल 5 लाख 99 हजार 758 वर्क स्लिप जारी की गई थीं, जिनमें से सिर्फ 53 हजार 249 ही सही पाई गईं। बाकी 5 लाख  46 हजार 509 वर्क स्लिप गलत निकलीं।

इसी तरह, कुल 2 लाख 21 हजार 517 मजदूरों के नाम दर्ज थे, लेकिन जांच के बाद सिर्फ 14 हजार 240 ही सही पाए गए, जबकि 1 लाख 93 हजार 756 मजदूरों के नाम फर्जी निकले।

इसका मतलब है कि बहुत बड़ी संख्या में गलत वर्क स्लिप और फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज किए गए थे। पूरे-पूरे गांव के लोगों  का फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर वर्क स्लिप बनवाई, जिससे पात्र मजदूरों की बजाय अपात्र लोगों के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपए की लूट की गई। खुद कैबिनेट मंत्री भी ज्यादातर वर्क स्लिप वेरिफिकेशन फर्जी होने की बात मान रहे हैं।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी राज में हजारों करोड़ रुपयों के घोटाले हुए, जिनमें शराब घोटाला, खनन घोटाला, ग्वाल पहाड़ी घोटाला, धान घोटाला, सहकारिता घोटाला, FPO घोटाला, HSSC भर्ती घोटाला, कैश फॉर जॉब घोटाला, HPSC रिश्वत घोटाला (दफ्तर में कैश पकड़ा गया), पेपर लीक घोटाला, बाजरा खरीद घोटाला, राशन घोटाला, सफाई फंड घोटाला, रोडवेज किलोमीटर स्कीम घोटाला, HTET घोटाला, छात्रवृति घोटाला, फसल बीमा घोटाला, बिजली मीटर खरीद घोटाला, मेडिकल सामान ख़रीद घोटाला, शुगर मिल घोटाला, अमृत योजना घोटाला, सड़क निर्माण घोटाला, स्टेडियम निर्माण घोटाला, Family ID घोटाला,  प्रोपर्टी ID घोटाला, आयुष्मान योजना घोटाला, गुरुग्राम नगर निगम घोटाला, फरीदाबाद नगर निगम घोटाला प्रमुख है। हिसार एयरपोर्ट पर 180 करोड़ रुपये का बिना नींव का बाउंड्रीवॉल घोटाला हुआ तो कैथल में सैंकड़ों करोड़ रुपये की कीमती जमीन को महज 12 करोड़ में नीलाम कर दिया गया। यही नहीं, हरियाणा में हुए भर्ती घोटाले ने तो संभवतः देश के सारे घोटालों को पीछे छोड़ दिया। HPSC दफ्तर में अधिकारियों के पास रिश्वत के 3 करोड़ 60 लाख रुपये पकड़े गये। हर प्रतियोगी परीक्षा के पर्चे आउट हुए हैं। हरियाणा में ऐसी कोई भर्ती नहीं हुई जिसका पेपर लीक या परीक्षा रद्द न हुई हो। घूसखोरी करने वाले अधिकारी से पूछताछ में एक रेट लिस्ट का खुलासा हुआ। डेंटल सर्जन के 35 से 40 लाख, स्टाफ नर्स के 20 लाख, ANM के 10 लाख इसी प्रकार हर छोटी बड़ी पोस्ट के कम और ज्यादा रेट थे। HPSC की वर्ष 2021 की डेंटल सर्जन भर्ती परीक्षा में BJP पार्षद, VHP नेता पर नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये हड़पने का मामला शामिल है।

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Author: Bharat Sarathi

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