हरियाणा विधानसभा में गूंजा गुरुग्राम का सवाल, भाजपा विधायक रहे मौन

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कांग्रेस और जन संगठनों ने उठाई आवाज़, अविश्वास प्रस्ताव से घिरी नायब सैनी सरकार

चंडीगढ़/गुरुग्राम, 18 दिसंबर। हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन गुरुग्राम की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा सदन में गूंजा, लेकिन विडंबना यह रही कि जिले के भाजपा विधायक इस पूरे मसले पर मौन साधे नजर आए। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने गुरुग्राम को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया, जबकि सत्ता पक्ष के स्थानीय जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार के सामने सवाल उठाने से बचते दिखाई दिए।

कांग्रेस विधायकों ने सदन में कहा कि गुरुग्राम, जिसे भाजपा सरकार “विकास का मॉडल” बताती है, आज प्रदूषण, अपराध, स्वास्थ्य संकट, ट्रैफिक जाम और अवैध निर्माण की मार झेल रहा है। सवाल उठाया गया कि जब प्रदेश का सबसे राजस्व देने वाला जिला ही बदहाली का शिकार है, तो बाकी हरियाणा की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

विपक्ष ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि गुरुग्राम के सभी विधायक भाजपा से हैं, इसके बावजूद न तो सदन में और न ही सरकार के भीतर जिले की जमीनी समस्याओं को मजबूती से उठाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता से जुड़े होने के कारण स्थानीय विधायक जनता की आवाज़ बनने के बजाय सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालने की भूमिका निभा रहे हैं।

सदन में यह भी कहा गया कि गुरुग्राम में सरकारी अस्पताल बदहाल हैं, फ़र्ज़ी डॉक्टर और अवैध मेडिकल स्टोर फल-फूल रहे हैं, प्रदूषण नियंत्रण के आदेश कागज़ों तक सीमित हैं और अपराध लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि गुरुग्राम की जनता की आवाज़ आज विधानसभा में विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से उठ रही है। समाजसेवी संगठनों, आरडब्ल्यूए और जागरूक नागरिक लगातार प्रशासन को चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन सरकार और स्थानीय विधायक अनसुनी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा हर मुद्दे पर चर्चा के दावे को विपक्ष ने औपचारिक बयान बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर सरकार सच में जवाबदेह होती तो अविश्वास प्रस्ताव लाने की नौबत ही नहीं आती।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सत्र न केवल सरकार की नीतियों की परीक्षा है, बल्कि यह भी उजागर कर रहा है कि सत्ता पक्ष के भीतर भी जनहित के मुद्दों को उठाने की इच्छाशक्ति की कमी है। गुरुग्राम का सवाल उठना इस बात का संकेत है कि जनता की पीड़ा अब विपक्ष के ज़रिये सदन तक पहुंच रही है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें