संसद हमले की 24वीं बरसी पर वीर शहीदों को नमन

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गुरिंदरजीत सिंह ने किया शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को सलाम

गुरुग्राम। 13 दिसंबर 2001 को भारत की संसद पर हुए कायराना आतंकी हमले की 24वीं बरसी पर गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि संसद पर हुए हमले के दौरान हमारे जवानों ने अद्वितीय साहस, सूझबूझ और राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए आतंकियों को संसद परिसर में प्रवेश से पहले ही ढेर कर दिया और अपने प्राणों की आहुति देकर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और करोड़ों नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

इस अवसर पर इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा, “वीर जवानों के कारण ही आज हम सुरक्षित और निडर होकर स्वतंत्र भारत में जीवन जी पा रहे हैं। संसद पर हुए हमले में हमारे जवानों ने अपने बलिदान से यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं। उनके इस बलिदान का कर्ज देश कभी चुका नहीं सकता।”

उन्होंने कहा कि जब-जब देश पर संकट आया है, तब-तब हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना हर चुनौती का सामना किया है। उनकी सतत सतर्कता, साहस और समर्पण के कारण ही आज देशवासी चैन की सांस ले पा रहे हैं और लोकतंत्र सुरक्षित है।

अग्निवीर योजना पर पुनर्विचार की मांग
इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने जवानों के सम्मान और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अग्निवीर योजना पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अग्निवीर के तहत भर्ती हुए जवानों को स्थायी रूप से सेना में शामिल किया जाए और पहले की तरह नियमित भर्ती प्रक्रिया को बहाल किया जाए, ताकि जवानों का भविष्य सुरक्षित हो और वे पूरी निष्ठा के साथ दीर्घकालिक देशसेवा कर सकें।

उन्होंने कहा, “देश का हर जवान हमारी शान है। उनके सम्मान, आत्मसम्मान और भविष्य की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सैनिकों की सेवा, त्याग और बलिदान को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि नीतियों और निर्णयों में भी सम्मान मिलना चाहिए।”

अंत में उन्होंने कहा कि भारतवर्ष हमेशा अपने वीर शहीदों और सैनिकों का ऋणी रहेगा और आने वाली पीढ़ियां उनके शौर्य और बलिदान से प्रेरणा लेती रहेंगी।

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Author: Bharat Sarathi

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