इंडिगो प्रकरण आधुनिक ईस्ट इंडिया कंपनी का आभास
करोड़ों यात्रियों की बेबसी और मोदी सरकार की कॉरपोरेट गुलामी का प्रत्यक्ष प्रमाण
केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय एवं नागरिक उड्डयन महानिदेशालय लापरवाह एवं विफल
फरुखनगर / गुरुग्राम, 8 दिसंबर। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुखबीर जे तंवर दुवारा 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित ऐतिहासिक “वोट चोर गद्दी छोड़” महारैली के लिए फरुखनगर खंड के गाँव खुर्रमपुर, खेड़ा खुर्रमपुर, हरिनगर डूमा, मुशेदपुर, जराऊ सुंदरपुर, सिवाड़ी ढाणी, सिवाड़ी, माजरी, बिरहेड़ा, पालडी एवं अलीमुद्दीनपुर में जनसंपर्क किया गया। जनसंपर्क के अवसर पर आयोजित नुक्कड़ बैठकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह महारैली राष्ट्र के संविधान, लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निरंतर गिरती हुई गरिमा की सुरक्षा के लिए आयोजित की जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महारैली देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को परिवर्तित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस और देश के नागरिक केवल मताधिकार की नही अपितु संस्थागत ईमानदारी, जवाबदेही और जनहित की लड़ाई लड़ रहे हैं।
इसी व्यापक संदर्भ में उन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इंडिगो हवाई सेवा में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाओं, यात्रियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार और केंद्र सरकार की नीतिगत विफलता पर कड़ी चिंता जताते हुये कहा कि इंडिगो में उड़ानों का निरस्त होना, घंटों की देरी, ओवरबुकिंग, तकनीकी बहानों के नाम पर यात्रियों को राष्ट्र के हवाई अड्डों पर असहाय छोड़ देना और बिना जवाबदेही के नागरिकों का शोषण अब सामान्य हो चुका है। करोड़ों यात्री मध्यमवर्ग, छात्र, बुज़ुर्ग, मरीज और कामकाजी लोग मानसिक, आर्थिक और सामाजिक पीड़ा झेल रहे हैं और केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
प्रदेश प्रवक्ता ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि ईस्ट इंडिया कंपनी भी व्यापार के नाम पर आई थी। पहले सुविधायें, फिर एकाधिकार और अंततः शासन तथा गुलामी। आज जब हवाई सेवायें कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट हाथों में सिमटती जा रही हैं और नियामक संस्थायें मौन हैं, तब इंडिगो प्रकरण आधुनिक “ईस्ट इंडिया कंपनी मॉडल” का बेहद डरावाना आभास कराता है। जहां नागरिक हित पीछे और कॉरपोरेट लाभ आगे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी उपक्रम एयर इंडिया को जानबूझकर कमजोर करके बेचना इस प्रक्रिया का अहम पड़ाव रहा। जनता से वादा किया गया था कि निजीकरण से सेवा सुधरेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लेकिन आज सच्चाई यह है कि एकाधिकार मजबूत, विकल्प सीमित और यात्री पूरी तरह निजी कंपनियों की दया पर आश्रित हैं। अगर एयर इंडिया को सार्वजनिक स्वामित्व में मजबूत रखा गया होता, तो आज करोड़ों यात्रियों को इस तरह की मनमानी और पीड़ा सहन नही करनी पड़ती। इंडिगो प्रकरण को देखकर यह भी प्रतीत होता है कि मोदी नीत केंद्र सरकार एक बार फिर किसी बड़े पूंजीपति मित्र को अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा लाभ पहुंचाने के प्रयास में है। शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव सरकार की मंशा और राष्ट्रीय हितों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। फर्क बस इतना है कि आज हथियार तलवार नहीं, बल्कि नीति, नियम और नियामक संस्थाओं की चुप्पी हैं। “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” का नारा अब नागरिकों के शोषण की सहूलियत में बदलता दिख रहा है। हवाई यात्रा सुविधा नहीं अपितु भय, अनिश्चितता और अपमान का अनुभव बनती जा रही है। लोकतंत्र और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विरुद्ध है।
कांग्रेस प्रवक्ता की मांग है की उड़ान निरस्त या अत्यधिक विलंब पर स्वचालित और समयबद्ध मुआवज़ा व्यवस्था लागू की जाए। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को कॉरपोरेट प्रभाव से तत्काल मुक्त कर वास्तविक दंडात्मक अधिकार दिए जाएं। हवाई यात्रियों की शिकायतों के लिए 24×7 जवाबदेह समाधान तंत्र सुनिश्चित किया जाये। यात्रियों से दुर्व्यवहार को कानूनी रूप से दंडनीय अपराध घोषित किया जाये। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बढ़ते एकाधिकार पर तत्काल रोक लगे। एयर इंडिया की बिक्री सहित निजीकरण नीतियों की संसदीय व सार्वजनिक समीक्षा कराई जाये।
सुखबीर जे तंवर ने 14 दिसंबर की “वोट चोर गद्दी छोड़” महारैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक मुद्दे की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा की है। “भारत ने कंपनी राज की गुलामी और आजादी दोनों देखी हैं। अब राष्ट्र को किसी नई कॉरपोरेट गुलामी की प्रयोगशाला नही बनने दिया जायेगा। नुककड़ बैठकों में बिशम्बर दयाल थानेदार, जगदेव यादव, धनीराम, प्रकाश, तुलेराम, सूबेदार धर्मबीर, राजन, राम सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।








