गुरु तेग बहादुर जी की शहादत मानवाधिकारों की महान विरासत — समाज को जागरूक होने की जरूरत

गुरुग्राम। 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर, गुरुग्राम) ने श्री गुरु तेग बहादुर जी, भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की शहादत को नमन करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियाँ पूरे विश्व को धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा का अद्वितीय संदेश देती हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का सर्वोच्च बलिदान उस समय के कमजोर, शोषित और असहाय लोगों की आस्था, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए था। उन्होंने जबरन धर्मांतरण का खुले रूप में विरोध किया और इसके लिए प्राण न्योछावर कर दिए।
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि आज भी देश के कई हिस्सों से लालच, दबाव या मजबूरी का फायदा उठाकर धर्मांतरण कराए जाने की खबरें सामने आती हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं। किसी व्यक्ति का स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन उसका अधिकार है, लेकिन किसी भी तरह की जबरदस्ती, लालच या दबाव पूरी तरह अस्वीकार्य है।
उन्होंने धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे इस विषय पर समाज को जागरूक करें। साथ ही, उन्होंने सरकार से मांग की कि जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए समयानुकूल और प्रभावी कानून बनाए जाएँ, जिससे आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता भारतीय संविधान द्वारा दिया गया मूल अधिकार है, जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म, पहनावे और परंपराओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता है।
उन्होंने हाल ही में राजस्थान में सिख समुदाय की एक लड़की को धार्मिक प्रतीक (ककार) पहनकर परीक्षा में बैठने से रोकने की घटना पर भी कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएँ धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं तथा इन्हें रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।
अंत में उन्होंने कहा कि समाज को दोनों मुद्दों— धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और जबरन धर्मांतरण पर रोक— पर समान रूप से कार्य करना चाहिए। इससे समाज में आपसी सम्मान, सद्भाव, शांति और विश्वास मजबूत होगा और देश की एकता भी सुदृढ़ होगी।








