हम खीर खाने वाले और फरसा उठाने वाले ब्राह्मण है – जयहिन्द
ब्राह्मण बोद्दा नहीं योद्धा है – जयहिन्द
युवाओं को सामाजिक व राजनीतिक रूप से जागरूक होने की जरूरत है – जयहिन्द
रौनक शर्मा

करनाल (3 अप्रैल) / वीरवार 3 अप्रैल को करनाल जिले में हजारों युवाओं व बुजुर्गों ने मिलकर भगवान परशुराम जी की शांतिपूर्ण तरीके से शोभा यात्रा निकली और सारस्वत ब्राह्मण भवन में परशुराम जी की जयंती मनाई। इस शुभ अवसर पर नवीन जयहिन्द भी शामिल रहे। जयहिन्द ने प्रधान अशोक बतूरा, उप–प्रधान राजा, महासचिव कुंदनलाल, तनु पंडित रजत पंडित, अजय पंडित, बाबू पंडित, आजाद शर्मा, मुकेश पंडित व पूरी आयोजक कर्ता टीम का धन्यवाद किया।
जयहिन्द ने कहा कि पूरे देश में कही न कही ब्राह्मणों को जरूर टारगेट किया जाता है, साथ ही जयहिन्द ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जब भी आपको कोई उल्टी–सीधी बात बोले तो उससे कहना कि हम खीर खाने वाले और फरसा उठाने वाले ब्राह्मण है और फरसा उठाने वाला योद्धा होता है।
पहरावर की लड़ाई में पूरे हरियाणा व हिंदुस्तान के लोगों ने साथ दिया था। ओर वह जमीन 36 बिरादरी के भाईचारे व फारसी के दम पर ली थी। बाहर से लोग आकर हमें गाली दे रहे तो हमने फरसे उठाए। भगवान परशुराम जी न्याय के देवता है, परशुराम जी ही भगवान भोलेनाथ की पहली कावंड लेकर आए थे, परशुराम जी ने ही भगवान श्री कृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया था व पूरी पृथ्वी जीत कर पहाड़ों में चले गए थे।
फरसा न्याय का प्रतीक है। फरसा गर्दन काटने के लिए नहीं है, बल्कि अपना मान–सम्मान व स्वाभिमान बचाने व न्याय दिलाने के लिए है। भगवान परशुराम से ही हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने की शक्ति मिलती है। और आज के युवाओं को सामाजिक व राजनीतिक रूप से जागरूक होने की जरूरत है।
यह दुनिया कमजोर लोगों की नहीं है बल्कि ताकतवर लोगों की है, तो हमें ताकतवर बनना पड़ेगा। इसके लिए हम सबको व खासकर युवाओं को नशे व अपराध से दूर रहना पड़ेगा। हमें जो आज समाज में सम्मान मिलता है वह सब हमारे बुजुर्गों की किए कामों का कमाल है।