महाभारतकालीन तीर्थ गढ़रथेश्वर जहां दानवीर कर्ण ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में ब्राह्मण वेशधारी श्री कृष्ण को अपना स्वर्ण दांत दान में दिया था।
वैद्य पंडित प्रमोद कौशिक

कुरुक्षेत्र के 48 कोस की पवित्र भूमि पर अनेकों प्राचीन तीर्थों का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से एक महाभारतकालीन गढ़रथेश्वर तीर्थ है, जो हरियाणा के कैथल जिले के कौल ग्राम के समीप स्थित है। यह स्थान महाभारत के महान दानवीर योद्धा कर्ण से संबंधित है।
महाभारत युद्ध से जुड़ा यह तीर्थ
जनश्रुतियों के अनुसार, महाभारत युद्ध के 17वें दिन जब अर्जुन और कर्ण के बीच घोर संग्राम चल रहा था, तभी कर्ण के रथ का पहिया भूमि में धँस गया। इसी कारण, जब कर्ण असहाय हो गए, तब अर्जुन ने उनका वध कर दिया।
किंवदंतियों के अनुसार, अपने अंतिम क्षणों में कर्ण ने ब्राह्मण वेशधारी श्रीकृष्ण को अपना स्वर्ण मंडित दांत दान में दिया। इस घटना के कारण यह स्थान दानवीर कर्ण की त्याग भावना और उदारता का प्रतीक बन गया। आज भी, इस तीर्थ पर श्रद्धालु आकर दानवीर कर्ण को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।
मंदिर और ऐतिहासिक अवशेष
इस तीर्थ पर एक उत्तर-मध्यकालीन मंदिर स्थित है, जिसके पूर्व में एक सरोवर भी है। मंदिर परिसर में मध्यकालीन मंदिर के स्तंभों के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिससे इस स्थान पर कभी एक विशाल मंदिर के अस्तित्व का प्रमाण मिलता है।
मंदिर के उत्तर और दक्षिण में लाखौरी ईंटों से निर्मित दो मेहराबी मीनारें स्थित हैं, जो किसी पुराने बाड़े से जुड़ी प्रतीत होती हैं। इस बाड़े के निर्माण में भी लाखौरी ईंटों का प्रयोग किया गया है, जो इसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।
गढ़रथेश्वर तीर्थ, महाभारत के महान पात्रों की स्मृतियों से जुड़ा एक पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है, जो आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।








