अहीरवाल के किसानों के साथ धोखा: नष्ट फसल का मुआवजा अधर में : विद्रोही

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भाजपा सरकार और बीमा कंपनियों की साठगांठ का आरोप

रेवाड़ी, 10 मार्च 2025 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि अहीरवाल क्षेत्र के कई गांवों में वर्षा और ओलों से नष्ट फसलों का ब्यौरा दर्ज करवाने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल अब तक नहीं खुला है, न ही सरकार की ओर से विशेष गिरदावरी करवाई गई है।

विद्रोही ने कहा कि जिन गांवों में वर्षा और ओलों से फसलें नष्ट हुई हैं, वहां सरसों की कटाई शुरू हो चुकी है और मंडियों में फसल आनी भी शुरू हो गई है। हरियाणा सरकार ने 15 मार्च से एमएसपी पर सरसों की खरीद की घोषणा तो कर दी, लेकिन जिन किसानों की फसलें नष्ट हुई हैं, उनके लिए न तो मुआवजे का पोर्टल खोला गया और न ही कोई गिरदावरी हुई।

सरकार और बीमा कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप

विद्रोही ने सवाल उठाया कि जब विशेष गिरदावरी ही नहीं हुई, तो यह सत्यापन कैसे होगा कि किसानों की फसल ओलावृष्टि से नष्ट हुई है या नहीं? और यदि फसल नष्ट हुई है, तो कटाई के बाद यह तय कैसे होगा कि कितना नुकसान हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोल रही और गिरदावरी में देरी करके बीमा कंपनियों के साथ मिलीभगत से किसानों को मुआवजे से वंचित कर रही है।

किसानों से 10 साल से हो रहा छलावा

विद्रोही ने कहा कि पिछले दस सालों से यही खेल चल रहा है। भाजपा सरकार बीमा कंपनियों के साथ सांठगांठ कर नियमों की आड़ में विशेष गिरदावरी और फसल नुकसान सत्यापन में देरी करती है, जिससे भाजपा-संघ के नेता बीमा कंपनियों से मोटा पैसा ऐंठते हैं।

अहीरवाल के किसानों को करना होगा विचार

उन्होंने कहा कि इस भ्रष्ट व्यवस्था का सबसे बड़ा शिकार अहीरवाल के किसान ही होते हैं। ऐसे में अब किसानों को सोचना होगा कि भाजपा को एकतरफा समर्थन देने से उन्हें क्या मिला? क्या धोखाधड़ी, भेदभाव और अन्याय के अलावा कुछ हासिल हुआ? विद्रोही ने किसानों से आह्वान किया कि वे इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें।

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Author: Bharat Sarathi

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