फसल क्षतिपूर्ति में घोटाला: बीमा कंपनियों और सरकार की मिलीभगत का पर्दाफाश : विद्रोही

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रेवाड़ी, गुरुग्राम, 4 मार्च 2025 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि 28 फरवरी और 1 मार्च को हुई बारिश व ओलावृष्टि से नष्ट फसलों का नुकसान दर्ज कराने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खुल ही नहीं रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पोर्टल ही बंद है, तो फिर किसान सरकार को अपने नुकसान की जानकारी कैसे देंगे?

विद्रोही ने कहा कि एक ओर सरकार किसानों को शीघ्र मुआवजा देने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी ओर न तो विशेष गिरदावरी हो रही है और न ही पोर्टल काम कर रहा है। यह सरकार की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसान हितैषी होने का दिखावा कर रही है, लेकिन वास्तव में वह बीमा कंपनियों के साथ मिलकर किसानों के हक पर डाका डाल रही है।

फसल बीमा घोटाले का बड़ा खुलासा

विद्रोही ने कहा कि बीते दस वर्षों में भाजपा सरकार और बीमा कंपनियों की मिलीभगत से फसल बीमा योजना में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए हैं। कुछ किसानों को मामूली मुआवजा देकर हजारों किसानों के हक का पैसा हड़प लिया जाता है। उन्होंने बताया कि संसद में प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि किसानों से वसूले गए प्रीमियम का मात्र 20% हिस्सा ही मुआवजे के रूप में लौटाया जाता है, शेष राशि बीमा कंपनियों और नेताओं के बीच बंट जाती है।

इलेक्टोरल बॉन्ड से रिश्वत का खेल

विद्रोही ने कहा कि बीमा कंपनियों ने भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मोटा चंदा रिश्वत के रूप में दिया है। यह दर्शाता है कि सरकार और बीमा कंपनियों की सांठगांठ के कारण किसानों के साथ धोखाधड़ी हो रही है।

हरियाणा में किसानों के साथ बड़ा छलावा

हरियाणा में किसानों की स्थिति बेहद दयनीय है। विद्रोही ने बताया कि दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में बारिश और ओलावृष्टि से हुई फसल बर्बादी का ब्यौरा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर मांगा गया था। 1763 गांवों के 52,099 किसानों ने 2.63 लाख एकड़ फसल खराब होने की रिपोर्ट दी थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी 2.03 लाख एकड़ फसल के नुकसान का सत्यापन नहीं किया गया। केवल 60,000 एकड़ फसल का ही सत्यापन हुआ, जिससे सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाती है।

मुख्यमंत्री से की गई मांग

विद्रोही ने मुख्यमंत्री से अपील की कि जुमलेबाजी छोड़कर सरकार को किसानों के हक की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार फसल बीमा कंपनियों पर सख्ती करते हुए पूरी पारदर्शिता से किसानों को उनका हक दिलवाने की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को समय पर पूरा मुआवजा नहीं दिया गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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Author: Bharat Sarathi

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