मेयर प्रत्याशी सुंदर लाल की सारथी बनकर चुनावी जंग में उतरी हैं महिलाएं

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मजबूत इरादों से मेयर प्रत्याशी सुंदर लाल के चुनाव की कमान संभाले हुए है मातृ शक्ति

-गांव-गांव, गली-गली, सोसायटियों में जाकर वोटर्स से कर रही मुलाकात

-मातृ शक्ति कदम-कदम पर सुंदर लाल को बना रही हैं मजबूत

गुरुग्राम। भाजपा के मेयर प्रत्याशी सरपंच सुंदर लाल की सारथी बनकर महिलाएं चुनावी जंग में उतरी हैं। सुबह से लेकर देर रात तक पूरे जोश और आत्मविश्वास के साथ महिलाओं के बढ़ते कदम बता रहे हैं कि लक्ष्य दूर नहीं है। चूल्हा-चौका संभालने वाली महिलाएं चुनाव की मजबूती से कमान संभाले हुए हैं। इस सत्य को नहीं झुठलाया जा सकता कि आधी आबादी जब कंधे के साथ कंधा मिलाकर चलते है तो बड़े से बड़े किले फतह किए जा सकते हैं।

सरपंच सुंदर लाल की जनसेवक के रूप में पिछले पांच साल से अधिक की मेेहनत की तस्वीर में रंग भरने का काम मातृ शक्ति कर रही है। चेहरे पर अदब का पर्दा और उसके भीतर से आत्मविश्वास से लबरेज महिलाएं चुनावी माहौल में खुद की शक्ति को साबित करती नजर आती हैं। चुनाव की इस जंग में जीत के हार सब पहनना चाहते हंै मगर कोई हारना नहीं चाहता। हार के अर्थ दो हो सकते हैं, लेकिन मातृ शक्ति भाजपा के मेयर प्रत्याशी सरपंच सुंदर लाल के समर्थन में दिन-रात एक करते हुए उन्हें जीत के हार पहनते देखना चाहती है।

चुनाव प्रचार में रोज नई गांव, नई गलियां देख रही महिलाए सहज ही हर किसी से घुल-मिल जाती हैं। महिलाओं के साथ उनका आत्मीयता से मिलना यह दर्शाता है कि ना जाने कितने समय से वे एक-दूसरे को जानती हैं। खास बात यह है कि जिस गांव में समर्थक महिलाएं जाती हैं, वहां की महिलाएं भी पूरी गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत, सत्कार करती हैं। पूरे मानेसर क्षेत्र में भाजपा के मेयर प्रत्याशी सरपंच सुंदर लाल किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।

भारतीय जनता पार्टी का चुनाव निशान कमल का फूल उन्होंने घर-घर पहुंचाया है। संगठन द्वारा दी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सरपंच सुंदर लाल ने जनसेवा के रूप में क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ रखी है। मानेसर के हर गांव, हर घर में उनके रसूखों की बानगी चुनाव प्रचार में देखी जा सकती है। बीती 14 फरवरी को अपना 47वां जन्मदिन मना चुके सरपंच सुंदर लाल को घर-परिवार व गांव-गोहांड की महिलाएं जन्मदिन के तोहफे के रूप में मानेसर जीत कर देना चाहती हैं।

महिलाओं का कहना है कि हर किसी के सुख-दुख में सुंदर लाल सदा आगे खड़े रहे हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक का वे बराबर सम्मान करते हैं। क्षेत्र में चाहे धर्म-कर्म की बात हो या खेलों की, चाहे शहीदों के सम्मान की बात हो या स्कूलों में काम कराने की बात हो। उन्होंने आगे बढक़र काम किया है। मानेसर को ऐसे ही व्यक्ति की जरूरत है, जो अच्छे काम करने के लिए अच्छी नीयत रखता हो।

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Author: Bharat Sarathi

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