प्राइमरी से लेकर उच्चतर, पूरे शिक्षा तंत्र का बीजेपी ने किया बंटाधार- हुड्डा

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हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, कॉलेजों में 4465 पद खाली – भूपेंद्र सिंह हुड्डा

चंडीगढ़, 25 फरवरी: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा की बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार ने प्रदेश के शिक्षा तंत्र को पूरी तरह से चौपट कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों से लेकर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक हर स्तर पर शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है।

“प्रदेश के कॉलेजों में 4465 पद खाली, 39 में तो प्रिंसिपल तक नहीं”

आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर हुड्डा ने बताया कि हरियाणा के 281 सरकारी और एडेड कॉलेजों में स्वीकृत 7986 शिक्षकों के पदों में से केवल 3358 पर ही नियुक्तियां हुई हैं, जबकि 4465 पद खाली पड़े हैं।

“बीजेपी सरकार बताए कि जब कॉलेजों में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो विद्यार्थियों को शिक्षा कौन देगा?”

इतना ही नहीं, प्रदेश के 39 एडेड कॉलेजों में तो स्थायी प्रिंसिपल तक नहीं हैं, जिससे शिक्षा का स्तर और भी अधिक गिर रहा है।

“नीति आयोग की रिपोर्ट ने भी खोली सरकार की पोल”

हुड्डा ने कहा कि हाल ही में आई नीति आयोग की रिपोर्ट भी हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत को उजागर कर चुकी है।

???? उच्च शिक्षा के मामले में हरियाणा अपने पड़ोसी राज्यों से पिछड़ चुका है।
???? विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में भी प्रदेश का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।
???? सरकार शिक्षा के बजट में कटौती कर रही है, जिससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सुविधाओं की भारी कमी हो रही है।

“शिक्षा पर GDP का सिर्फ 2% खर्च, जबकि जरूरत 6% की”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर GDP का 6% खर्च करने की सिफारिश की गई है, लेकिन हरियाणा सरकार महज 2% ही खर्च कर रही है। कम बजट और शिक्षकों की कमी के कारण उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट रेट लगातार बढ़ रहा है और कॉलेजों में सीटें खाली रह रही हैं।

“स्कूलों की हालत दयनीय, 96 छात्राओं पर सिर्फ 1 टीचर”

हुड्डा ने बताया कि सरकारी स्कूलों की स्थिति भी बेहद दयनीय है।

“सिरसा के कालांवली स्कूल में 96 छात्राओं को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक गेस्ट टीचर तैनात है, जो पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल का रिकॉर्ड मेंटेन करने, मीटिंग्स में जाने और मिड-डे मील तक की जिम्मेदारी निभा रहा है।”

प्रदेश के कई अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।

“हरियाणा के 28 स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं”

प्रदेश में कई स्कूल ऐसे हैं जहां छात्रों की संख्या नगण्य है:

???? 28 प्राइमरी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं।
???? 262 स्कूलों में सिर्फ 1 से 10 विद्यार्थी।
???? 520 स्कूलों में 11 से 20 विद्यार्थी।
???? 8 मिडिल स्कूलों में भी छात्रों की संख्या शून्य।

यह आंकड़े चीख-चीख कर सरकार की नाकामी को उजागर कर रहे हैं।

“सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं”

हुड्डा ने कहा कि सरकारी स्कूलों में दलित, पिछड़े वर्ग, गरीब और किसान वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बीजेपी सरकार इन्हें शिक्षा से वंचित करना चाहती है।

“प्रदेश के 131 सरकारी स्कूलों में पीने का पानी नहीं, 236 स्कूलों में बिजली कनेक्शन तक नहीं दिया गया। 538 स्कूलों में लड़कियों के लिए और 1047 स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय तक नहीं हैं।”

“शिक्षा मंत्री ने खुद मानी टीचर्स की भारी कमी”

हुड्डा ने कहा कि आज भी खुद शिक्षा मंत्री मानते हैं कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है और ड्रॉपआउट रेट बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद सरकार इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

“बीजेपी को बताना चाहिए कि 10 साल से सत्ता में होने के बावजूद उसने शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए क्या किया?”

“कांग्रेस के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए”

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हरियाणा में बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था स्थापित की थी।

???? 12 नए सरकारी विश्वविद्यालय खोले।
???? 154 नए पॉलिटेक्निक कॉलेज, 56 नए आईटीआई और 4 नए सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित किए।
???? बाबा साहेब अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना।
???? 2623 नए स्कूल बनवाए और हर जिले में DIET खोले।
???? 25,000 जेबीटी, 25,000 टीजीटी-पीजीटी शिक्षकों समेत 1 लाख से अधिक नौकरियां दीं।

“जब कांग्रेस सरकार में इतनी नौकरियां दी गईं, तो बीजेपी ने शिक्षकों की भर्ती क्यों बंद कर दी?”

“हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था को बचाना जरूरी”

हुड्डा ने कहा कि अगर जल्द ही शिक्षा क्षेत्र में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ी को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से तुरंत शिक्षकों की भर्ती शुरू करने, स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने और शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने की मांग की।

“शिक्षा से समझौता करने वाली सरकार को जनता कभी माफ नहीं करेगी।”

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Author: Bharat Sarathi

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