प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक के माध्यम से वकीलों की आवाज़ को दबाना चाहती है सरकार-चौधरी संतोख सिंह

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भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 अधिवक्ताओं की एकता, स्वायत्तता और गरिमा के विरुद्ध है।

गुरुग्राम, 23 फरवरी: जिला बार एसोसिएशन गुरुग्राम के पूर्व प्रधान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2025 अधिवक्ताओं की एकता, स्वायत्तता और गरिमा के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक अन्यायपूर्ण, अनुचित और पक्षपातपूर्ण है। प्रस्तावित अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक तानाशाहीपूर्ण प्रकृति का है। यह विधेयक अधिवक्ताओं की एकता, अखंडता और गरिमा के बिल्कुल खिलाफ है। प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक सीधे तौर पर देश की सभी जिला, खंड एवं तहसील स्तर पर बार एसोसिएशनों, सभी राज्यों की बार काउंसिल एवं बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया की स्वायत्तता को प्रभावित करेगा।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार है। धरना-प्रदर्शन और हड़ताल करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन अधिनियम के माध्यम से वकीलों के अधिकारों पर अंकुश लगाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक के माध्यम से वकीलों की आवाज़ को दबाना चाहती है।

13 फरवरी, 2025 को अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2025 को विधि मामलों के विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक परामर्श के लिए उपलब्ध कराया गया था।

अधिवक्ता संशोधन विधेयक के अनुसार न्यायालयों के कार्य का बहिष्कार या उससे विरत रहने पर प्रतिबन्ध।अधिवक्ताओं का कोई भी संघ या संघ का कोई भी सदस्य या कोई भी अधिवक्ता, व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से, न्यायालयों के कार्य का बहिष्कार या विरत रहने का आह्वान नहीं करेगा या न्यायालयों के कार्य का बहिष्कार या विरत रहने या न्यायालय के कार्य में या न्यायालय परिसर में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करेगा। उल्लंघन कदाचार माना जाएगा और अधिनियम तथा विनियमों के अन्तर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा। हम बार काउंसिल की समिति में केन्द्र सरकार के तीन सदस्यों को शामिल करने का पुरजोर विरोध करते हैं।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक का विरोध हो रहा है। उन्होंने सरकार से माँग की कि अधिवक्ता संशोधन विधेयक को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए अन्यथा पूरे देश के अधिवक्ता एक जुट होकर आंदोलन करेंगे।

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Author: Bharat Sarathi

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