इलेक्शन के साइड इफेक्ट ….. चुनाव प्रचार का शोर अब ध्वनि प्रदूषण में बदलने लगा

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एक के बाद एक लाउडस्पीकर बजाते आगे निकलने की होड़

एक ही वार्ड में सुनाई दे रहा दूसरे वार्ड उम्मीदवारों के प्रचार का शोर

चुनाव प्रचार में दौड़ रहे वाहनों पर परमिशन लेटर नहीं दिखाई दे रहे

फतह सिंह उजाला

गुरुग्राम/ मानेसर /पटौदी । अक्सर देखा गया होगा कि अस्पताल और स्कूलों के बाहर हॉर्न नहीं बजाने के सिंबल या स्टीकर लगे हुए दिखाई देते हैं । लेकिन अब जब चुनाव का सीजन अपने चरम पर है तो चुनाव प्रचार का शोर तो होगा ही। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है विभिन्न उम्मीदवारों को उनके पसंद के इलेक्शन सिंबल आवंटन होने के बाद आकर्षक गीत और लुभाने वाले गाने भी वाहनों पर लगे लाउडस्पीकर से शोर मचाने लगे हैं । इस प्रकार के चुनाव प्रचार का शोर कथित रूप से ध्वनि प्रदूषण का रूप लेता हुआ भी देखा जा सकता है । यह तब होता है, जब एक ही गाली या रास्ते या फिर चौराहे पर विभिन्न उम्मीदवारों के प्रचार वाले वाहन आगे पीछे दौड़ते हुए एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में दिखाई देते हैं।

चुनाव प्रचार में अधिकांश तीन पहिया वाहन या अन्य वाहन भी अपनी-अपनी सुविधा और समर्थ के मुताबिक चुनाव के उम्मीदवारों के द्वारा दौड़ने के लिए लगाए गए हैं । इन्हीं वाहनों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से अपने-अपने पक्ष में अपना-अपना चुनाव चिन्ह जोर-जोर से बताते हुए बटन दबाने का आह्वान भी किया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर बीच बाजार के बीच या फिर चौराहे पर प्रचार में लगे वहां ठहरकर प्रचार करने को ही प्राथमिकता देते हुए देखे जा सकते हैं । इस संदर्भ में विभिन्न लोगों के द्वारा नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी-अपनी शिकायत भी अलग-अलग तरीके से की जाने लगी है । रोहित बंसल ने शिकायत करते हुए कहा गहरी नींद में सोए छोटे बच्चे भी डर के मारे उठकर रोने लगते हैं । गली में कान फाड़ शोर मचाते हुए चुनाव प्रचार के लिए वाहन दौड़ रहे हैं। गली के साथ-साथ मुख्य सड़क पर भी इसी प्रकार का शोर परेशान करता रहता है।

बोर्ड और होम एग्जाम की तैयारी कर रहे बच्चे भी इसी प्रकार के शोर से परेशान होने लगे हैं । 27 फरवरी से बोर्ड के एग्जाम होने हैं । ना चाहते हुए भी एग्जाम की तैयारी कर रहे बच्चों को किस उम्मीदवार के लिए कौन से चुनाव चिन्ह का बटन दबाना है । यह प्रचार जबरदस्ती सुनना पड़ रहा है । कई लोगों के द्वारा सवाल किया गया जिस संख्या में और तेजी से वाहनों पर चुनाव के उम्मीदवार के फ्लेक्स पोस्टर इत्यादि लगाकर लाउडस्पीकर से प्रचार किया जा रहा है, ऐसे वाहनों में अधिकांश पर परमिशन लेटर तक दिखाई नहीं दे रहे हैं ? चुनाव लड़ना और प्रचार करना उम्मीदवार का मौलिक अधिकार है। लेकिन अनावश्यक प्रदूषण से बचे रहना भी लोगों की सेहत के लिए जरूरी है । बड़े बुजुर्ग और रोगी भी दिन भर के कान फाड़ शोर से परेशान होना आरंभ हो चुके हैं। कई बार तो मोबाइल फोन पर बात करते-करते चुनाव प्रचार वाला वाहन इतना शोर करता हुआ आता है , कि मोबाइल पर एक दूसरे की बात सुनना भी मुश्किल होता जा रहा है।

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Author: Bharat Sarathi

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