दोस्ती इम्तिहान लेती है: मेक इन इंडिया बनाम अमेरिकी फर्स्ट

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तुलसी, मस्क, रामास्वामी के बाद, मोदी की ट्रंप से ऐतिहासिक मुलाकात

भारत और अमेरिका के पौराणिक संबंधों और वर्तमान नेतृत्व की दोस्ती के दूरगामी सकारात्मक परिणाम

– एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

गोंदिया – वैश्विक दृष्टि से 20 जनवरी 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शपथ ग्रहण करने से लेकर उनके द्वारा किए जा रहे निर्णयों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। हर कदम पर नफे-नुकसान का आकलन हो रहा है, लेकिन एक नई और महत्वपूर्ण घटना भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 2:30 बजे अमेरिकी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ऐतिहासिक मुलाकात से जुड़ी रही। यह मुलाकात टैरिफ, अवैध आव्रजन, चीन का मुद्दा, रक्षा, नई तकनीकी, और अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित रही।

भारत ने अमेरिकी दौरे से पूर्व अपने मैक्सिमम टैरिफ को 150 प्रतिशत से घटाकर 70 प्रतिशत कर दिया था, ताकि बातचीत का माहौल सकारात्मक हो सके। भारतीय व्यापार नीति में ये बदलाव बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं, क्योंकि 1990-91 तक भारत का औसत टैरिफ 125 प्रतिशत था, जो अब घटकर 11.66 प्रतिशत हो चुका है। इस बदलाव का असर भारत और अमेरिका के रिश्तों पर दिखता है, खासकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों में और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।

पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा और मुलाकातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिकी दौरा बहुत ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक था। वॉशिंगटन डीसी में प्रधानमंत्री का शानदार स्वागत हुआ और उनकी मुलाकातें भी काफी असरदार साबित हुईं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज, एलोन मस्क, और भारतीय-अमेरिकी व्यवसायी विवेक रामास्वामी से मुलाकात की। इन मुलाकातों के दौरान कई महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं, जिनमें व्यापार, सुरक्षा, और तकनीकी मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।प्रधानमंत्री मोदी ने एलोन मस्क से एक घंटे तक बातचीत की और उन्हें मेमेंटो भेंट किया। इसके बाद, मोदी ने विवेक रामास्वामी से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों का उद्देश्य भारत और अमेरिका के व्यापार और तकनीकी संबंधों को मजबूत करना था।दोस्ती इम्तिहान लेती है – पीएम मोदी और ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस गुरुवार सुबह दोनों वैश्विक नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पूछा गया कि ट्रंप और मोदी में कौन ज्यादा सशक्त वार्ताकार हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वह उनसे कहीं ज्यादा टफ नेगोशिएटर हैं। मोदी ने अवैध प्रवासियों की वापसी के मुद्दे पर स्पष्ट किया कि भारत उन लोगों को वापस लेने के लिए तैयार है जो भारत के नागरिक हैं, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे को मानव तस्करी के दृष्टिकोण से भी देखा और कहा कि इस पर दोनों देशों को मिलकर काम करना चाहिए।

भारत और अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी एकजुट होने का संकल्प लिया। पीएम मोदी ने 2008 के मुंबई हमलों के अपराधी तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण पर ट्रंप का आभार जताया।

भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा समझौतों का ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते हुए। इस बैठक में अमेरिका ने भारत को तेल और गैस का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनने का वादा किया। इसके अलावा, अमेरिकी परमाणु प्रौद्योगिकी के लिए भारत में सुधार की प्रक्रिया भी शुरू की गई, जिससे भारतीय बाजार में अमेरिकी उत्पादों का और विस्तार होगा।ट्रंप का ट्वीट और व्यापार नीति ट्रंप ने अपनी मुलाकात से कुछ घंटे पहले एक रहस्यमयी ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने “पारस्परिक टैरिफ” की नीति को लागू करने की बात की थी। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका अब उन देशों पर उतना ही शुल्क लगाएगा, जितना वे अमेरिका के उत्पादों पर लगाते हैं। इस नीति का असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ट्रंप पहले ही भारत को ‘टैरिफ किंग’ कह चुके हैं।

निष्कर्ष
भारत और अमेरिका के रिश्तों में यह मुलाकात एक नया अध्याय जोड़ने वाली साबित हुई। जहां एक ओर व्यापारिक नीतियों पर बहस हुई, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा, आतंकवाद, और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी दोनों देशों ने सहयोग का प्रस्ताव रखा। कुल मिलाकर यह मुलाकात दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी और इसका वैश्विक स्तर पर गहरा प्रभाव होगा।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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Author: Bharat Sarathi

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