गुरुग्राम, : बुधवार को नगर निगम गुरुग्राम में उस समय हड़कंप बच गया जब एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जेडटीओ सहित दो कर्मचारियों को 50 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथों दबोच लिया। निगम कर्मचारियों पर शिकायतकर्ता ने हाउस टैक्स कम करने के लिए एक लाख की मांग की थी। शिकायत के बाद टीम ने रेड कर जेडटीओ के स्टाफ को रंगे हाथों पकड़ लिया। पकड़े गए कर्मचारियों पर यह आरोप है कि जेडटीओ के नाम पर यह रकम मांगी गई थी। टीम ने टैक्स ब्रांच से उनके मोबाइल और एक पीसी भी अपने साथ ले गई है।

एसीबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सेक्टर 7 निवासी कृष्ण सचदेवा ने एसीबी को दी कई शिकायत में बताया था कि उनका हाउस टैक्स अधिक आया हुआ था जिसको ठीक करने के लिए वह कई बार नगर निगम के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन कर्मचारी उसको ठीक नहीं कर रहे हैं। वहीं उन्होंने बताया कि टैक्स ठीक करने के लिए एक लाख रुपए मांग रहे हैं। जिसकी शिकायत ब्यूरो को दी थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसीबी ने डीएसपी मीना कुमारी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया। इस टीम ने बुधवार दोपहर नगर निगम के सिविल लाइन ऑफिस में रेड की। यहां पर जेडटीओ के सहायक कर्मचारी दीपक कुमार को पचास हजार की रिश्वत सहित पकड़ा।

इस कार्यवाही में एचएसआईडीसी के एजीएम हरिकृष्ण बतौर डयूटी मैजिस्ट्रेट मौजूद रहे। यहां से टीम जेडटीओ और कर्मचारी को लेकर सेक्टर 47 एसीबी ऑफिस पहुंची। यहां पर एसपी ने जेडटीओ समीर श्रीवास्तव और कर्मचारी दीपक से पूछताछ की। इसके बाद देर शाम दोनों को अरेस्ट कर लिया। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया। एसीबी के एएसआई ने बताया कि जेडटीओ और उसके सहायक कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वहीं बताया गया है कि वीरवार को आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

बता दें कि नगर निगम गुरुग्राम में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, लेकिन अधिकतर शहरवासी शिकायत करने में आगे नहीं आते हैं, जिससे निगम में बैठे भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। वहीं शहर में इस बात की चर्चा आम है कि नगर निगम की विज्ञापन शाखा, एनफोर्समेंट, डेवलपमेंट, बागवानी, साफ सफाई, डीटीपी व राजस्व विभाग व अन्य में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। वहीं मुख्यमंत्री द्वारा चलाए गई बाजार की स्वामित्व योजना में भी अरबों-खरबों का महा घोटाला हुआ है। जिसकी शिकायत भी निगम आयुक्त से लेकर प्रदेश के आल्हा अधिकारियों तक पहुंची हुई है फिर भी राजनीतिक दबाव के चलते मामले फाइलों में दबे पड़े है। एसीबी द्वारा की गई यह कार्रवाई तो एक बहुत ही छोटी है। महा घोटाले में सख्त कार्रवाई करने में प्रदेश सरकार भी मौन बनी हुई है।

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