अपनी बोली, अपने मुद्दे… कहीं चौधर का नारा तो कहीं यादव बदल देते हैं चुनावों की तस्वी

अशोक कुमार कौशिक 

बोली और मिट्टी के आधार पर कई क्षेत्रों व जिलों में बंटा हरियाणा राजनीतिक दृष्टि से सात बेल्ट में बसा हुआ है। प्रदेश में बांगर, बागड़, खादर-नदरक, देशवाली बेल्ट (जाटलैंड), अहीरवाल, मेवाती और दक्षिण हरियाणा की बेल्ट है। 

वैसे हरियाणा की राजनीति में दशकों तक पांच घरानों का वर्चस्व रहा है। अब भाजपा उस वर्चस्व को तोड़ती हुई नजर आ रही है। मंगलवार को जब नायब सैनी को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया गया, तो यह बात और ज्यादा पुख्ता हो गई। साल 2014 में मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया गया था। खट्टर और सैनी, ये दोनों ऐसे नाम हैं, जिनकी प्रदेश के राजनीतिक पटल पर कोई बड़ी पहचान नहीं रही। मुख्यमंत्री बनने से पहले खट्टर एक सामान्य कार्यकर्ता रहे थे। हालांकि आरएसएस में उनकी सक्रियता लगातार रही है। इसी तरह मौजूदा सांसद नायब सैनी, जो पहले हरियाणा सरकार में राज्य मंत्री रहे हैं, उनका प्रदेश की सियासत में कोई खास प्रभाव नहीं था। उन्हें गत वर्ष ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। 2014 से पहले प्रदेश की सियासत में पांच राजनीतिक घरानों से ही कोई न कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री के पद पर काबिज रहा था।

जानकारों का कहना है कि प्रदेश की सियासत में पांच घरानों ने परिवारवाद की कहानी को आगे बढ़ाया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके पिता एवं स्वतंत्रता सेनानी रणबीर हुड्डा आजादी के बाद पहली बार रोहतक सीट से ही जीत दर्ज करा कर संसद पहुंचे थे। वे दूसरी बार भी लोकसभा के लिए चुने गए। उसके बाद वे एमएलए भी रहे और बाद में राज्यसभा सांसद बने। भूपेंद्र हुड्डा चार बार सांसद रहे हैं। भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा भी तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। गत लोकसभा चुनाव में पिता पुत्र दोनों हार गए थे। फिलहाल भूपेंद्र हुड्डा विधायक तो दीपेंद्र हुड्डा राज्यसभा सांसद हैं।

प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने वाले स्व: चौधरी भजनलाल ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ग्राम पंचायत में पंच बनकर की थी। वे नौ बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने जब भी आदमपुर से चुनाव लड़ा, तो वहां की जनता ने सदैव उन्हें विजयी बनाया। उनके बेटे चंद्रमोहन प्रदेश में डिप्टी सीएम रह चुके हैं। दूसरे बेटे कुलदीप बिश्नोई लोकसभा सांसद और विधायक भी रहे हैं। उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई भी विधायक रही हैं। गत लोकसभा चुनाव में उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने हिसार सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गए थे। हालांकि नवंबर 2022 के उपचुनाव में भव्य बिश्नोई ने जीत दर्ज कराई थी। 

स्व: बंसीलाल तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। उसके बाद उनकी राजनीतिक विरासत को छोटे बेटे सुरेंद्र सिंह ने आगे बढ़ाया। सुरेंद्र सिंह, लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद और विधायक भी रहे। उन्होंने 1996 और 1998 का लोकसभा चुनाव जीता था। 2005 में एक हेलीकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई थी। उनके बाद पत्नी किरण चौधरी विधायक बनीं। वे कई विधायक चुनी गई हैं। उनकी बेटी श्रुति चौधरी ने 2009 में भिवानी सीट से लोकसभा चुनाव जीता था। 2014 और 2019 में वे हार गईं। किरण चौधरी के अलावा बंसीलाल के दूसरे बेटे रणबीर महेंद्रा और दामाद सोमबीर भी राजनीति में रहे हैं।

स्व: देवीलाल, जिन्हें लोग प्यार से ताऊ कहते थे, वे भी दो बार हरियाणा के सीएम रहे हैं। इससे पहले वे पंजाब में भी विधायक बने थे। वे देश के उप प्रधानमंत्री भी रहे। देवीलाल के बाद उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने राजनीतिक विरासत संभाली। हरियाणा में चौटाला चार बार मुख्यमंत्री बने। चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला हरियाणा और राजस्थान में विधायक रहे हैं। वे लोकसभा सांसद भी चुने गए। बाद में शिक्षक भर्ती घोटाले में इन दोनों को 10 साल की जेल हो गई। चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला ने इनेलो पार्टी की कमान संभाली। उधर, अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला भी सांसद बन गए। दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय भी राजनीति में आ गए। अजय की पत्नी नैना चौटाला भी विधायक बन गईं। दुष्यंत चौटाला ने अलग पार्टी जजपा का गठन कर लिया। 2019 में भाजपा जजपा गठबंधन की सरकार में डिप्टी सीएम बने थे। चौ. छोटूराम के राजनीतिक वंशज, चौधरी बीरेंद्र सिंह हैं। वे मोदी सरकार में मंत्री रहे हैं। राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। बीरेंद्र सिंह 5 बार विधायक भी रहे। उनके बेटे ब्रजेंद्र सिंह सांसद बने हैं। ब्रजेंद्र सिंह की मां प्रेमलता भी विधायक रही हैं।

केंद्रीय मंत्री, राव इंद्रजीत सिंह के पिता राव बीरेंद्र सिंह भी हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं। राव इंद्रजीत सिंह 1977 से 1996 के बीच चार बार विधानसभा सदस्य चुने जा चुके हैं। वे दो बार महेंद्रगढ़ सीट से और दो बार गुरुग्राम से लोकसभा में पहुंचे हैं। 2014 में राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया था। वे भाजपा में शामिल हो गए।

अहीरवाल: महेंद्रगढ़-नारनौल और रेवाड़ी

राजस्थान के साथ लगने के चलते यहां के लोगों की बोली पर इसकी झलक दिखती है। अहीरवाल में पानी बड़ा मुद्दा है। यहां लोगों को पीने के लिए पानी की किल्लत है और इसके अलावा यहां पर खेतों की नहरी पानी से सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे जमीन बंजर है। हर चुनाव में सभी दल इस मुद्दे को भुनाते हैं। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत का अहीरवाल में बड़ा नाम है। पिछले चार बार से वह लगातार सांसद हैं। इनमें दो बार वे भाजपा व दो बार कांग्रेस की टिकट पर जीते। इनके अलावा, यहां पर कांग्रेस के कैप्टन अजय यादव, पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा, राव दान सिंह समेत अन्य नेताओं का भी प्रभाव है।

खादर-नरदक: उत्तरी हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर व पंचकूला

नदियां होने के चलते यहां की धरती उपजाऊ है और इस क्षेत्र के लोगों की बोली मीठी है। इन जिलों में बाढ़ की समस्या बड़ी है। हर साल यमुना नदी, टांगरी और मारकंडा नदी में बाढ़ से लोग परेशान हैं। हर साल नदियों के साथ लगती फसलें खराब होती हैं और आसपास के गांव व कस्बे इससे प्रभावित होते हैं। यहां कभी भी चौधर और क्षेत्र में सत्ता का नारा नहीं रहा। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल करनाल से और गृह मंत्री अनिल विज विधायक हैं। इनके अलावा, यहां से कोई बड़ा चेहरा नहीं है। कांग्रेस में यहां पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा और पूर्व मंत्री निर्मल सिंह का नाम आता है।

दक्षिण हरियाणा : गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल

यूपी के साथ लगने के चलते यहां पर बृज भाषा का असर है। गुरुग्राम और फरीदाबाद दिल्ली से सटे हैं, ऐसे में खूब विकास हो रहा है। नए उद्योगों या निवेश में कोई कमी नहीं लेकिन बढ़ता हुआ अपराध व पानी की कमी बड़ा निवेश में कोई कमी नहीं लेकिन बढ़ता हुआ अपराध व पानी की कमी बड़ा मुद्दा है। बेरोजगारी यहां की बड़ी समस्या है। नेताओं की बात करें तो केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, अवतार और करतार भड़ाना परिवार का यहां पर दबदबा है। साथ ही कर्ण सिंह दलाल भी बड़ा चेहरा हैं।

बागड़: हिसार, भिवानी, चरखीदादरी सिरसा व फतेहाबाद।

राजस्थान और पंजाब से सटे होने के चलते यहां पर बागड़ी और पंजाबी दोनों ही भाषाएं बोली जाती हैं। इस क्षेत्र में नशा सबसे बड़ा मुद्दा है। यूं तो प्रदेश के 16 जिले नशे से प्रभावित हैं, लेकिन हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी सबसे अधिक प्रभावित हैं और यहां पर ओवरडोज से युवाओं की जान जा रही है। यहां पर चौधरी ओमप्रकाश चौटाला, चौधरी बंसीलाल और भजनलाल परिवार का दबदबा रहा है। मौजूदा स्थिति में भजनलाल परिवार से कुलदीप बिशनोई, बंसीलाल परिवार से किरण चौधरी और चौटाला परिवार से अजय और अभय राजनीतिक विरासत संभाले हुए हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह बेल्ट प्रदेश की सबसे मजबूत रही है और ताऊ देवीलाल समेत इस धरती ने चार मुख्यमंत्री दिए हैं।

बांगर: जींद और कैथल

उचाना को तो बांगर की राजधानी तक कहा जाता है। साफगोई और बेबाकी के लिए यह धरती जानी जाती है। राजनीतिक रूप से यहां के लोग काफी मजबूत हैं और राजनीति की अच्छी समझ रखते हैं। अधिकतर सरकारों में बांगर की हिस्सेदारी रही, लेकिन हरियाणा के अलग प्रदेश बनने के 58 साल बाद विकास की कमी है। आज तक इस धरती का कोई बेटा प्रदेश का मुखिया नहीं बन सका। हां, ओमप्रकाश चौटाला नरवाना से विधायक होते हुए सीएम बने थे, लेकिन उनका मुख्य क्षेत्र सिरसा रहा है। इस क्षेत्र की दिक्कत ये है कि जमीन कम उपजाऊ है, खेतों को नहरी पानी की कमी है। औरों के मुकाबले दोनों शहरों में विकास कार्य कम हुए और रोजगार के लिए कोई बड़ा उद्योग यहां पर नहीं है। चौधरी बीरेंद्र सिंह और रणदीप सिंह सुरजेवाला इस क्षेत्र के दो बड़े चेहरे हैं, लेकिन दोनों में कोई भी प्रदेश का मुखिया नहीं बन सका है।

देशवाली बेल्ट: रोहतक, सोनीपत, झज्जर और पानीपत

इस बेल्ट को जाटलैंड भी कहा जाता है। यहां खड़ी बोली बोली जाती है। जमीन उपजाऊ है और राजनीतिक रूप से लोग काफी मजबूत हैं। यहां चौधर का नारा चलता है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा का दबदबा है और वह इसी चौधर के नारे के दम पर दो बार प्रदेश के सीएम भी रहे। हुड्डा के मुख्यमंत्री रहते इस क्षेत्र ने काफी तरक्की है और सड़कों के साथ साथ आईएमटी आने से यहां पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। इनके अलावा, पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यू, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर का रोहतक में प्रभाव है।

मेवात: नूंह व आसपास का मुस्लिम बहुल इलाका

यहां पर अधिकतर मुस्लिम नेताओं का ही प्रभाव है। यहां पर शिक्षा का स्तर भी कम है। दिल्ली के नजदीक होने और एनसीआर में होने के बावजूद यहां पर विकास नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कों के साथ साथ बढ़ता अपराध यहां के मुद्दे हैं। इसके अलावा, बेरोजगारी और कोई नया उद्योग नहीं लगना भी मुद्दे हैं। यहां से तीनों विधायक कांग्रेस के हैं। नेताओं की बात करें कांग्रेस के आफताब अहमद और भाजपा नेता जाकिर हुसैन का यहां पर प्रभाव है।

error: Content is protected !!