नसीबपुर शहीद स्मारक के लिए एकमुश्त बजट और निर्माण पूरा करने की समयसीमा तय करने की मांग
अहीरवाल के सांसदों, विधायकों और सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान
चंडीगढ़/रेवाडी, 5 नवंबर 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अंबाला में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की स्मृति में बने संग्रहालय के उद्घाटन का स्वागत करते हुए हरियाणा भाजपा सरकार से सवाल किया कि नसीबपुर-नारनौल के रणबांकुरों की स्मृति में प्रस्तावित भव्य स्मारक का इंतजार आखिर कब समाप्त होगा? उन्होंने मांग की कि सरकार स्मारक निर्माण के लिए एकमुश्त बजट जारी करे और इसे पूरा करने की निश्चित समयसीमा घोषित करे।
विद्रोही ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को सहेजना और उनके संघर्ष से नई पीढ़ी को परिचित कराना सराहनीय कार्य है। अंबाला का संग्रहालय युवाओं को आजादी के आंदोलन का इतिहास जानने और देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों से प्रेरणा लेने का अवसर देगा। इसी भावना और प्रतिबद्धता के साथ नसीबपुर के ऐतिहासिक रणक्षेत्र को भी उसका उचित सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला, हांसी और नसीबपुर हरियाणा के प्रमुख संघर्ष केंद्र रहे। इन क्षेत्रों के वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। नसीबपुर का मैदान अहीरवाल की वीरता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष का अमिट प्रतीक है। राव तुलाराम के नेतृत्व में हुए प्रतिरोध तथा अहीरवाल, राठ, जाटात और मेवात के वीरों की शौर्यगाथा को जन-जन तक पहुंचाना हम सबका साझा दायित्व है।
विद्रोही ने कहा कि शहीदों के प्रति सम्मान केवल श्रद्धांजलि और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए; वह स्मारक निर्माण की ठोस कार्रवाई में भी दिखाई देना चाहिए। नसीबपुर में भव्य स्मारक के निर्माण को प्राथमिकता देकर सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि काम कब शुरू होगा और कब तक पूरा किया जाएगा।
उन्होंने अहीरवाल के सभी निर्वाचित सांसदों, विधायकों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि वे दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर इस मांग के समर्थन में एकजुट हों। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने वाले योद्धा पूरे देश की साझा विरासत हैं। उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने का प्रयास भी सामूहिक होना चाहिए।
विद्रोही ने मांग की कि स्मारक निर्माण की धनराशि टुकड़ों में जारी करने के बजाय आवश्यक बजट एकमुश्त उपलब्ध कराया जाए, ताकि धन के अभाव में काम बाधित न हो। साथ ही निर्माण की नियमित समीक्षा और प्रगति की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा कि नसीबपुर में बनने वाला स्मारक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान का जीवंत परिचय होना चाहिए। यह वीरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होने के साथ आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और देश के लिए सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा जगाएगा।








