राज्यपाल ने जनप्रतिनिधि सम्मेलन के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में किया संबोधित
वरिष्ठतम पूर्व विधायक श्री गणपत राय और श्री ओ.पी. भारद्वाज को किया सम्मानित
संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने में जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका: प्रो. असीम कुमार घोष

पंचकूला , 2 नवंबर – हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के लोगों और राज्य के बीच एक जीवंत संवैधानिक समझौता है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है।
राज्यपाल सोमवार को हरियाणा विधान सभा की ओर से पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर राज्यपाल ने आयु में वरिष्ठतम पूर्व विधायक श्री गणपत राय और श्री ओपी भारद्वाज को उनकी सीटों पर पहुंच कर सम्मानित किया। श्री गणपत राय का जन्म जून, 1935 में तथा श्री ओपी भारद्वाज का जुलाई 1935 में हुआ था।
विधायकों को संवैधानिक मूल्यों का सबसे महत्वपूर्ण संरक्षक बताते हुए प्रो. घोष ने कहा कि शपथ ग्रहण के माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधि संविधान की रक्षा और उसके सिद्धांतों को बनाए रखने का संकल्प लेते हैं। वहीं, सदन में बहस, प्रश्नों और कानून निर्माण के माध्यम से वे इस संकल्प को धरातल पर उतारते हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र की मजबूती विधायी संस्थाओं में होने वाले सार्थक संवाद, गरिमापूर्ण असहमति और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाने वाले निर्णयों पर निर्भर करती है।

राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस सम्मेलन में हरियाणा विधान सभा के वर्तमान एवं पूर्व सदस्य एक मंच पर एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक अपने अनुभव और संस्थागत ज्ञान के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को समृद्ध करते हैं, जबकि वर्तमान विधायक अपनी ऊर्जा और वर्तमान दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता के साथ योगदान देते हैं। दोनों पीढ़ियों के बीच इस प्रकार का संवाद लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उत्कृष्ट संसदीय कार्यप्रणालियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी समान रूप से बोध होना चाहिए। लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती उसके नागरिकों की संवैधानिक समझ, जागरूकता और प्रतिबद्धता में निहित है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे इस सम्मेलन के संदेश को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों तक पहुंचाएं और विशेष रूप से युवाओं के साथ संवाद स्थापित करें। वे स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को संविधान के महत्व से अवगत कराएं तथा नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करें। साथ ही, मौलिक अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूकता बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों का आचरण ईमानदारी, शालीनता और जनसेवा की भावना का आदर्श उदाहरण होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि समावेशी विकसित हरियाणा और समावेशी विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हुए संविधान को सदैव अपना मार्गदर्शक बनाए रखना होगा।
प्रो. असीम कुमार घोष ने जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उत्कृष्ट आयोजन के लिए हरियाणा विधान सभा और विधान सभा अध्यक्ष को बधाई दी। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सदस्यों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर हरियाणा विधान सभा के अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण, विधान सभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्णा मिड्ढा, विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व विधान सभा अध्यक्ष श्री ज्ञान चंद गुप्ता एवं श्री कुलदीप शर्मा तथा इनेलो विधायक श्री अर्जुन चौटाला ने समापन सत्र में मंच साझा किया। इस अवसर पर विधायकगण, पूर्व विधायक, मंत्रीगण एवं पूर्व मंत्री भी उपस्थित रहे।








