8 अक्टूबर को संयुक्त विपक्ष के जिला स्तरीय प्रदर्शनों में भाग लेने की अपील, मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी की मांग
रेवाडी, 6 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा के आम नागरिकों से कथित वोट चोरी के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर 8 अक्टूबर को होने वाले संयुक्त विपक्ष के प्रदर्शनों में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में प्रस्तावित इन प्रदर्शनों में शामिल होकर लोग लोकतंत्र, संविधान और अपने मताधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठाएं।
विद्रोही ने कहा कि यदि मतदाता के वोट में हेराफेरी करके जनादेश बदला जाएगा तो लोकतंत्र और चुनाव की सार्थकता पर ही सवाल खड़े हो जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, केंद्र की मोदी सरकार, भाजपा और संघ की कथित मिलीभगत से चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, जनादेश से खिलवाड़ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है और नागरिकों का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा तोड़ता है।
उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा केवल राजनीतिक दलों का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। यदि आम नागरिक कथित वोट चोरी के खिलाफ मजबूती से आवाज नहीं उठाएंगे तो लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ और जनता की निर्णायक भूमिका कमजोर पड़ जाएगी।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
विद्रोही ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनका आचरण भाजपा के पक्ष में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इससे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हुई हैं।
दो चुनाव आयुक्तों के कथित असहमति नोट का उल्लेख करते हुए विद्रोही ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्णयों पर आयोग के भीतर उठे सवालों की स्थिति देश के सामने स्पष्ट होनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में पारदर्शिता आवश्यक है, क्योंकि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता सीधे मतदाताओं के विश्वास से जुड़ी है।
फॉर्म-6 में बदलाव पर जवाबदेही की मांग
विद्रोही ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन बदलावों को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, जबकि इस दावे पर सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार महीनों से चुनाव आयोग और भाजपा इस विषय पर देश को गुमराह करते रहे हैं।
विद्रोही ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अनुमति का गलत हवाला दिए जाने को सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताया। उन्होंने इसे गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने इन आरोपों को अत्यंत गंभीर बताते हुए इसे देशद्रोह की श्रेणी का कृत्य बताया।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनभागीदारी जरूरी
विद्रोही ने आरोप लगाया कि जिन संवैधानिक संस्थाओं पर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी है, वे अपनी भूमिका निभाने में विफल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करने वाली संस्था और केंद्र सरकार पर ही जनादेश को प्रभावित करने के आरोप उठें तो नागरिकों की चिंता स्वाभाविक है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि 8 अक्टूबर को अपने-अपने जिलों में संयुक्त विपक्ष के प्रदर्शनों में भाग लेकर निष्पक्ष चुनाव, मताधिकार की सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही की मांग को मजबूत करें। विद्रोही ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जनता को स्वयं आगे आकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।









