जागरूक नागरिक मंच ने गुरुग्राम की बदहाली और अतिक्रमण पर कार्रवाई में दोहरे मापदंड का लगाया आरोप
दस वर्षों की घोषणाओं का हिसाब मांगा; समाधान नहीं होने पर आरडब्ल्यूए और सामाजिक संगठनों के साथ शांतिपूर्ण जन आंदोलन की चेतावनी

गुरुग्राम। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों पर अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई होती है, लेकिन नेताओं के कथित अवैध प्रचार बोर्डों पर प्रशासन चुप क्यों रहता है? भारी-भरकम टैक्स चुकाने वाले नागरिक टूटी सड़कों, सीवर ओवरफ्लो, कचरे के ढेरों और उड़ती धूल से कब तक जूझते रहेंगे? जागरूक नागरिक मंच, गुरुग्राम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शासन-प्रशासन से ये सवाल पूछे हैं। मंच ने आरोप लगाया कि विश्वस्तरीय ‘मिलेनियम सिटी’ कहलाने वाले शहर में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली के बीच बैठकों, घोषणाओं और समयसीमाओं का सिलसिला तो जारी है, लेकिन नागरिकों को स्थायी राहत नहीं मिल रही।
मंच ने नगर निगम गुरुग्राम, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और राज्य सरकार से सार्वजनिक जवाब मांगा है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि धरातल पर सुधार नहीं दिखा तो शहर की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को एकजुट कर व्यापक, शांतिपूर्ण और निर्णायक जन आंदोलन किया जाएगा।
अतिक्रमण पर कार्रवाई में भेदभाव क्यों?

जागरूक नागरिक मंच ने आरोप लगाया कि नगर निगम का बुलडोजर छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ अतिक्रमण हटाने के नाम पर चलता है, जबकि चौक-चौराहों, बिजली के खंभों और फुटपाथों पर मौजूदा तथा पूर्व विधायकों, सांसदों और पार्षदों के बधाई व प्रचार बोर्ड लगे रहते हैं।
मंच ने सवाल उठाया कि जब फुटपाथ घेरने पर गरीब रेहड़ी वाले का ठेला जब्त किया जा सकता है, तो राजनीतिक प्रचार बोर्डों के मामले में वैसी ही सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती? क्या इनसे सार्वजनिक स्थानों पर अवरोध पैदा नहीं होता?
विज्ञप्ति में संपत्ति विरूपण रोकने संबंधी कानून और उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए मंच ने पूछा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले राजनीतिक बोर्डों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और जुर्माना वसूलने जैसी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? मंच ने कहा कि अतिक्रमण के मामले में कानून का समान रूप से पालन होना चाहिए।
दस साल से वही समस्याएं, वही समयसीमा

मंच ने कहा कि घर-घर से कूड़ा उठान, बंधवाड़ी लैंडफिल, सीवर की सफाई, बारिश में जलभराव और धूल का प्रदूषण पिछले एक दशक से बैठकों के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। इसके बावजूद नागरिकों को बार-बार उन्हीं परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मंच ने सवाल किया कि जब समस्याएं वही हैं और हर बार उन्हें दूर करने के लिए नई समयसीमा घोषित करनी पड़ती है, तो पिछली कार्ययोजनाओं के परिणाम कहां हैं? क्या प्रशासन अपनी योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की कमियों को स्वीकार कर जिम्मेदारी तय करेगा?
घोषणाओं का हिसाब जनता को दें
मंच ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की समयबद्ध समाधान संबंधी घोषणाओं पर हुई कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। उसने पूछा कि क्या जनता को कभी बताया गया कि पिछली दस घोषणाओं में से कितनी पूरी हुईं और कितनी अधूरी पड़ी हैं?
मंच ने यह भी पूछा कि तय समय में काम पूरा नहीं करने वाली एजेंसियों, लापरवाह अधिकारियों और चूक करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई? उसके अनुसार, केवल नई समयसीमा घोषित करने से जवाबदेही पूरी नहीं होती; पिछली समयसीमा टूटने का कारण और उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर हुई कार्रवाई भी सामने आनी चाहिए।
सड़क बनती है, फिर खोद दी जाती है
विभागीय समन्वय पर सवाल उठाते हुए मंच ने आरोप लगाया कि नगर निगम, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा जनता भुगत रही है।
मंच के अनुसार, एक विभाग सड़क बनाता है और दूसरा सीवर या केबल डालने के लिए उसे खोद देता है। इससे नागरिकों की परेशानी बढ़ने के साथ सार्वजनिक धन की बर्बादी भी होती है। मंच ने पूछा कि जनता के टैक्स से होने वाले ऐसे खर्च और बार-बार क्षतिग्रस्त होते बुनियादी ढांचे की व्यक्तिगत जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय की जाती है?
बस सेवा और पार्कों की उपेक्षा पर सवाल
मंच ने सार्वजनिक परिवहन और पार्कों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उसने पूछा कि कॉर्पोरेट हब के रूप में पहचान रखने वाले गुरुग्राम में नागरिकों की जरूरत के अनुरूप व्यवस्थित, भरोसेमंद और पर्याप्त सिटी बस नेटवर्क क्यों उपलब्ध नहीं हो पा रहा?
साथ ही सार्वजनिक पार्कों की सुरक्षा, सफाई और हरियाली की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मंच ने इसके लिए जिम्मेदार विभागों से जवाब मांगा। मंच ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षित, साफ-सुथरे पार्क शहरवासियों की बुनियादी जरूरतें हैं।
धरातल पर काम नहीं हुआ तो आंदोलन
जागरूक नागरिक मंच ने कहा कि शहर केवल भारी टैक्स चुकाने और चुनावी भाषण सुनने की प्रयोगशाला नहीं है। नागरिकों को बंद कमरों की बैठकों, फाइलों और बयानों से आगे वास्तविक सुधार चाहिए।
मंच ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक अतिक्रमण और अवैध होर्डिंग्स हटाने तथा सीवर, कचरा, टूटी सड़कों और उड़ती धूल की समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग पर वह चुप नहीं बैठेगा।
मंच ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई में कथित दोहरा मापदंड समाप्त कर जमीन पर काम नहीं दिखाया तो आरडब्ल्यूए, सामाजिक संगठनों और आम जनता को साथ लेकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। नागरिक अधिकारों और शहर की बुनियादी सुविधाओं के लिए होने वाले इस शांतिपूर्ण जन आंदोलन की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।








