पंजीकरण में अड़चनों और जिलावार खरीद सीमा का किसान सभा ने किया विरोध; सूखा प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की मांग
पाबड़ा नहर से फरीदपुर माइनर में पानी छोड़ने को लेकर 22 अक्टूबर को हिसार में प्रदर्शन

बरवाला, 3 अक्टूबर। अखिल भारतीय किसान सभा ने हरियाणा में धान खरीद और पंजीकरण पर लगाई गई शर्तों का विरोध करते हुए सरकार से किसानों की पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की मांग की है। गांव बालक में लखीमपुर खीरी शहीदी दिवस पर आयोजित जनसभा में किसान नेताओं ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने के बजाय शर्तों, खरीद सीमा और पोर्टल की अड़चनों से किसानों की परेशानी बढ़ाई जा रही है।
जनसभा की अध्यक्षता गांव कमेटी के प्रधान मास्टर बलराज सिंह ने की। इसमें किसान सभा के जिला सचिव सरबत सिंह पूनिया और बरवाला तहसील सचिव सत्यवान रेढू विशेष रूप से उपस्थित रहे। किसान सभा ने पाबड़ा नहर से फरीदपुर माइनर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर 22 अक्टूबर को हिसार स्थित नहर विभाग कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपने की घोषणा की।
पंजीकरण अधूरा, खरीद में किसान परेशान
जनसभा को संबोधित करते हुए सरबत सिंह पूनिया ने आरोप लगाया कि सरकार धान खरीद पर अनावश्यक शर्तें और सीमा लगाकर किसानों को परेशान कर रही है। उन्होंने मांग की कि इन शर्तों को तत्काल हटाया जाए और किसानों की पूरी उपज की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जाए।
पूनिया ने कहा कि पंजीकरण पोर्टल केवल एक सप्ताह खोलने और उसमें अव्यावहारिक शर्तें लगाने के कारण बड़ी संख्या में किसान पंजीकरण नहीं करवा पाए। अब पंजीकरण के अभाव में उनकी धान की खरीद नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें ‘पोर्टल राज’ में उलझा रही है।
उन्होंने कहा कि सभी किसानों का पंजीकरण और फसलों के रिकॉर्ड का मिलान पूरा किए बिना खरीद में बाधाएं खड़ी करना अनुचित है। इसका खामियाजा अपनी तैयार फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
पूरी पैदावार की खरीद से पीछे हटने का आरोप

पूनिया ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए उसे ‘झूठ और लूट की सरकार’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार फसलों की एमएसपी पर खरीद का दावा करती है, लेकिन वास्तविक खरीद के समय ऐसी शर्तें लगा देती है, जिनसे किसान अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हाल में जारी निर्देशों में प्रति एकड़ पूरी पैदावार खरीदने के बजाय जिलावार खरीद सीमा तय की गई है। इसके साथ फसल कटाई का समय निर्धारित करने, गेटपास और पोर्टल संबंधी प्रक्रियाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
पूनिया ने कहा, “सरकार को किसानों पर शर्तें थोपने के बजाय अधिकारियों को निर्देश देने चाहिए कि मंडियों में किसी किसान को परेशानी न हो। लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। यह किसानों के प्रति सरकार की उदासीनता दर्शाता है।”
गेहूं के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के मुद्दे पर भी किसान सभा ने नाराजगी जताई। सभा ने प्रेस नोट में बताई गई 25 रुपये की बढ़ोतरी को ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ करार दिया।
पंजीकरण के आधार पर मिले भावांतर राशि
किसान सभा के तहसील सचिव सत्यवान रेढू और गांव बालक कमेटी के प्रधान मास्टर बलराज सिंह ने भी खरीद संबंधी निर्देशों का विरोध किया। उन्होंने मांग की कि किसानों के हितों के प्रतिकूल शर्तें वापस लेकर मंडियों में व्यवस्थित तरीके से एमएसपी पर फसल खरीद सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि बाजरा और मूंग सहित संबंधित फसलों की भावांतर राशि को मंडी में फसल बेचने की शर्त से जोड़ने के बजाय किसान द्वारा कराए गए पंजीकरण के आधार पर सीधे उसके खाते में डाला जाए।
सूखे के नुकसान की गिरदावरी कराए सरकार
किसान सभा ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने, फसलों के नुकसान की गिरदावरी कराने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की।
किसान नेताओं ने कहा कि सूखे के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खेती बर्बाद होने से किसान कर्ज के जाल में फंसने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान अपनी समस्याओं को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।
सिंचाई के पानी के लिए 22 को प्रदर्शन
किसान नेताओं ने बताया कि पाबड़ा नहर से फरीदपुर माइनर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर किसान सभा 22 अक्टूबर को हिसार में नहर विभाग कार्यालय पर प्रदर्शन करेगी और ज्ञापन सौंपेगी। उन्होंने सरकार से खरीद, पंजीकरण, मुआवजे और सिंचाई से जुड़े मुद्दों का समाधान करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि समस्याएं दूर नहीं हुईं तो किसान सभा सड़कों पर उतरकर आंदोलन तेज करेगी।
इस अवसर पर कमेटी सचिव जोगेंद्र शर्मा, शीशराम प्रधान, बलजीत सिंह, धर्मबीर, महावीर, चांदीराम, कृष्ण कुमार, सतबीर ठोलेदार, जोगिंदर रेढू, जगदीश फौजी, निहाल सिंह, उदयवीर और रणधीर सहित अन्य लोगों ने भी सरकार की किसान संबंधी नीतियों की आलोचना की।









