भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ श्री दुर्गा देवी मंदिर, श्रद्धालुओं ने मांगी सुख-समृद्धि
थानेसर, संजीव कुमारी। श्री दुर्गा देवी मंदिर, पिपली में भगवान श्रीकृष्ण की छठी का पावन उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम मंदिर के पीठाधीश एवं ज्योतिष-वास्तु आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा के निर्देशन में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर के संरक्षक एवं पुजारी पंडित राहुल मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा संपन्न करवाई।
बाल स्वरूप को लगाया भोग
डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद मनाई जाने वाली छठी का धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान के बाल स्वरूप का पूजन कर उन्हें पारंपरिक पकवानों और मिष्ठान का भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक छठी पूजन करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है तथा संतान के आरोग्य, दीर्घायु और मंगल का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
मंदिर में आयोजित भजन-कीर्तन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। मां दुर्गा मंडली की सुमित्रा पाहवा, शिमला देवी, निशा अरोड़ा, आशा कवात्रा, ऊषा शर्मा, कोमल मेहरा, सरोज शर्मा, सुरेंद्र कौर और ज्योति तलवाड़ ने मां दुर्गा तथा भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर भेंटें प्रस्तुत कीं। भक्त सुशील तलवाड़ ने भी भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।
कीर्तन और आरती के बाद भगवान को भोग लगाया गया तथा श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक कार्यक्रम सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ भारतीय सनातन संस्कृति की परंपराओं को जीवंत रखते हैं।
आत्मा ही हमारी वास्तविक पहचान : समर्थगुरु
समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश दिया कि मनुष्य को हमेशा स्मरण रखना चाहिए कि उसकी वास्तविक पहचान आत्मा है। आत्मा के प्रति सजग रहना ही साक्षीभाव है।








