तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में एमसीजी की बड़ी पहल

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ एमओयू, सीएसआर सहयोग से विकसित होंगे गुरुग्राम के तालाब, तीन वर्षों तक रखरखाव की भी जिम्मेदारी

गुरुग्राम, 17 जुलाई। शहर के पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देते हुए नगर निगम गुरुग्राम ने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं। इन समझौतों के माध्यम से शहर के चयनित तालाबों का समग्र विकास, सौंदर्यीकरण, हरित विकास, स्वच्छता तथा दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

शुक्रवार को नगर निगम गुरुग्राम ने आर्ट ऑफ लिविंग के साथ भोंडसी तालाब (सोहना रोड), दौलताबाद तालाब (जहाजगढ़ रोड) तथा मैदावास तालाब के संरक्षण एवं विकास के लिए एमओयू किया है। इसके अलावा वन स्टेप एनजीओ के साथ भोंडसी स्थित गीतानंद आश्रम तालाब तथा गिव मी ट्रीज़ एनजीओ के साथ दरबारीपुर तालाब (हरबक्शा मंदिर के निकट) के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए समझौता किया गया है।

इन सभी एमओयू की अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है। पहले वर्ष में संबंधित संस्थाएं तालाबों का व्यापक विकास, सौंदर्यीकरण, हरित क्षेत्र का विस्तार एवं अन्य आवश्यक कार्य करेंगी। इसके बाद अगले दो वर्षों तक उन्हीं संस्थाओं द्वारा तालाबों का संचालन एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि इन जल स्रोतों की गुणवत्ता और उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे।

इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इन परियोजनाओं पर होने वाला संपूर्ण वित्तीय व्यय संबंधित एनजीओ अथवा उनके कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सहयोगियों द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे नगर निगम गुरुग्राम पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

नगर निगम का उद्देश्य जनभागीदारी और सीएसआर सहयोग के माध्यम से शहर के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना, वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देना, भूजल स्तर में सुधार करना, जैव विविधता को संरक्षित करना तथा गुरुग्राम को अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल शहर के रूप में विकसित करना है। यह पहल भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ नागरिकों के लिए बेहतर प्राकृतिक एवं सार्वजनिक स्थलों का निर्माण भी करेगी।

नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नगर निगम गुरुग्राम विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और सीएसआर भागीदारों के सहयोग से शहर के पारंपरिक तालाबों का संरक्षण एवं पुनर्जीवन कर रहा है। यह पहल न केवल जल स्रोतों को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि भूजल संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को भी बढ़ावा देगी। जनभागीदारी के माध्यम से हम गुरुग्राम को एक अधिक हरित, स्वच्छ और जल-सुरक्षित शहर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस मौके पर अतिरिक्त निगमायुक्त प्रदीप यादव, संयुक्त आयुक्त डॉ प्रीतपाल सिंह, कार्यकारी अभियंता सचिन यादव, सहायक अभियंता हरिप्रकाश, कनिष्ठ अभियंता प्रियदीप सोनी व मेकिंग मॉडल गुरुग्राम की प्रतिनिधि गौरी सरीन सहित संबंधित एनजीओ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!