आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा ‘महेश’ ने 17 जुलाई को प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन शुभारंभ के मुहूर्त पर उठाए सवाल, वैदिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के पालन पर दिया जोर।
पानीपत। ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा ‘महेश’ ने कहा है कि राष्ट्रहित और समाजहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों एवं परियोजनाओं के शुभारंभ में वैदिक परंपराओं और मुहूर्त विज्ञान की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल हिन्दुत्व की चर्चा करने या उसका राजनीतिक उपयोग करने से देश को मानसिक, आध्यात्मिक और आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। यदि वास्तव में हिन्दुत्व की स्थापना करनी है तो धर्म के सिद्धांतों और शास्त्रीय मान्यताओं का पालन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब विषय राष्ट्रकल्याण का हो, तब समाज के विद्वानों और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज को मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए, बल्कि अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर समाज एवं शासन का मार्गदर्शन करना चाहिए।
आचार्य महेन्द्र शर्मा ने दावा किया कि भारत पहले भी कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसरों पर गलत मुहूर्तों के कारण प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कर चुका है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन, शिलान्यास और मूर्ति स्थापना के समय निर्धारित मुहूर्तों को लेकर भी उन्होंने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनका कहना है कि वर्ष 2019 में शिलान्यास मुहूर्त के संबंध में उनसे राय मांगी गई थी और उन्होंने उस समय भी इसे शुभ नहीं माना था।
उन्होंने 6 सितंबर 2019 को चंद्रयान-2 की लैंडिंग का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दिन चंद्रमा ज्येष्ठा गण्डमूल नक्षत्र में तथा नीचस्थ स्थिति में था और उनके अनुसार यह मुहूर्त अनुकूल नहीं था।
आचार्य महेन्द्र शर्मा ने कहा कि 17 जुलाई 2026 को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ के लिए भी शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है। उनके अनुसार 15 जुलाई से गुरु अस्त हो रहे हैं और 9 अगस्त को पुनः उदित होंगे। इस अवधि में शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों और मांगलिक आयोजनों से परहेज किया जाता है।
उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को व्यतिपात योग रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसके अतिरिक्त उसी दिन चतुर्थी तिथि प्रातः 6:28 बजे से अगले दिन प्रातः 4:43 बजे तक रहेगी, जिसे रिक्ता तिथि माना जाता है और इसमें भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।
आचार्य महेन्द्र शर्मा के अनुसार शुक्रवार को पड़ने वाली प्रविष्ट द्वितीया तिथि को ‘मृत्युदा योग’ कहा जाता है और इस दिन भी शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र के बड़े निर्णयों और परियोजनाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ भारतीय ज्योतिषीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए।








