ग्रीन बेल्ट में टॉयलेट निर्माण पर फिर भड़का विवाद, दलबदल की राजनीति का परिणाम बता रहे सेक्टरवासी: दिनेश वशिष्ठ

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स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और लिखित शिकायतों के बावजूद निर्माण दोबारा शुरू होने पर पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने उठाए सवाल

गुरुग्राम, 12 जुलाई। सेक्टर-5 की ग्रीन बेल्ट में स्थानीय निवासियों के तीव्र विरोध और पूर्व में दी गई लिखित शिकायतों के बावजूद टॉयलेट निर्माण कार्य दोबारा शुरू किए जाने पर पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिनेश वशिष्ठ ने इसे जनभावनाओं की अनदेखी तथा वार्ड-35 में दलबदल की राजनीति का परिणाम बताया है।

पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिनेश वशिष्ठ ने कहा कि वार्ड-35 के पार्षद परमिंदर कटारिया ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर जनता का समर्थन प्राप्त किया था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन उम्मीदों और विकास के वादों के साथ जनता ने उन्हें ऐतिहासिक समर्थन दिया था, आज वही जनता स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

वशिष्ठ ने कहा कि जब विकास कार्यों का श्रेय लेने की बात आती है तो जनप्रतिनिधि सबसे आगे दिखाई देते हैं, लेकिन जैसे ही किसी परियोजना का विरोध होता है या विवाद खड़ा होता है, उसकी जिम्मेदारी से बचने के लिए आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। उन्होंने इसे जनता को गुमराह करने वाली राजनीति करार दिया।

उन्होंने बताया कि सेक्टर-5 पार्ट-6 स्थित ग्रीन बेल्ट में टॉयलेट निर्माण का स्थानीय निवासियों ने शुरू से ही विरोध किया था। शिकायतों और आपत्तियों के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया था, लेकिन बिना शिकायतों का समाधान किए तथा बिना स्थानीय लोगों की सहमति लिए कार्य को पुनः शुरू कर दिया गया है। उनके अनुसार यह न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया की अनदेखी है, बल्कि क्षेत्रवासियों की भावनाओं की भी उपेक्षा है।

दिनेश वशिष्ठ ने कहा कि संबंधित स्थान ग्रीन बेल्ट क्षेत्र है और पूर्व में इस निर्माण को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) सहित विभिन्न विभागों को शिकायत भी भेजी जा चुकी है। उनका कहना है कि क्षेत्र के अधिकांश निवासी इस निर्माण के पक्ष में नहीं हैं और उनका मानना है कि इससे ग्रीन बेल्ट की मूल अवधारणा तथा क्षेत्र की सौंदर्यता प्रभावित होगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड-35 में विकास कार्यों के नाम पर पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है। कौन-सा कार्य किसकी स्वीकृति से किया जा रहा है और उसका वास्तविक उद्देश्य क्या है, इस बारे में स्थानीय लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जनहित के बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।

वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि वार्ड-35 में विकास कार्यों की आड़ में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न तो कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया स्पष्ट है और न ही यह बताया जा रहा है कि इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ किसे मिलेगा। उनका आरोप है कि जनहित की अनदेखी कर राजनीतिक स्वार्थों और व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।

पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने प्रशासन, नगर निगम और राज्य सरकार से मांग की कि ग्रीन बेल्ट में चल रहे टॉयलेट निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा स्थानीय निवासियों की शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्रवासियों की भावनाओं और आपत्तियों की लगातार अनदेखी की जाती रही तो सेक्टरवासी लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी।

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Author: Bharat Sarathi

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