खाद-बीज संकट, बढ़ती लागत और एमएसपी खरीद पर सरकार को घेरा; कहा- किसान को अब ब्लैक में खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा
रेवाडी, 2 जून 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा-संघ के 12 वर्षों के शासन के बाद किसानों की आय दोगुनी करने का वर्ष 2014 का चुनावी वादा पूरी तरह जुमला साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि किसान की आय दोगुनी होने की बजाय पिछले 12 वर्षों में लगभग जस की तस बनी हुई है, जबकि किसान कर्ज के भारी बोझ तले दब गया है।
विद्रोही ने कहा कि मोदी-भाजपा शासन में जहां किसान आय दोगुनी होने का दावा खोखला साबित हुआ, वहीं खेती की लागत 2014 की तुलना में दोगुनी-तिगुनी जरूर हो गई। इसके साथ ही उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती महंगाई ने किसान की आर्थिक स्थिति को और बदतर कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 की तुलना में किसानों पर कृषि कर्ज का बोझ दो से तीन गुना तक बढ़ चुका है, जबकि किसानों के जीवन स्तर में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता।
उन्होंने कहा कि फसलों की सरकारी खरीद में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। जब कांग्रेस-यूपीए सरकार ने सत्ता छोड़ी थी, तब किसानों की कुल फसल उत्पादन का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा ही घोषित एमएसपी पर खरीदा जाता था और आज 12 साल बाद भी स्थिति लगभग वैसी ही बनी हुई है।
विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी और भाजपा सरकार से सवाल किया कि आखिर उनके 12 वर्षों के शासन में किसानों और खेतिहर मजदूरों को प्रताड़ना, कर्ज, महंगाई और बेरोजगारी के अलावा मिला क्या? उन्होंने पूछा कि सरकार की कथित किसान सहायता योजनाओं, सब्सिडी और एमएसपी खरीद के बड़े-बड़े दावों के बावजूद खेती की लागत लगातार क्यों बढ़ती गई और किसानों की आय वर्ष 2014 के स्तर से आगे क्यों नहीं बढ़ पाई?
उन्होंने कहा कि अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि किसानों को अपनी फसल की बिजाई के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे। किसान निजी व्यापारियों से महंगे दामों पर बीज खरीदने को मजबूर हैं, जबकि खाद की खरीद में भी कालाबाजारी बढ़ रही है।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि अब किसानों को खाद खरीदने के लिए सरकारी पोर्टल पर अग्रिम आवेदन करना होगा और आवेदन की पुष्टि के बाद ही खाद उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर खाद मिलना और मुश्किल हो जाएगा तथा बिजाई के समय मजबूर होकर उन्हें ब्लैक में खाद खरीदनी पड़ेगी।
उन्होंने आशंका जताई कि ईरान-अमेरिका तनाव और खाड़ी क्षेत्र की परिस्थितियों के चलते खरीफ फसल 2026 के दौरान खाद की भारी कमी सामने आ सकती है। यदि समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हुई तो बिजाई और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे, जिससे किसानों पर कृषि कर्ज का बोझ और बढ़ना तय है।









