बीजेपी सरकार ने हरियाणा के शिक्षा तंत्र को बर्बाद कर दिया – दीपेन्द्र हुड्डा

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·        भारत सरकार की परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रैंकिंग में हरियाणा साल भर में ही राष्ट्रीय रैंकिंग में 8वें स्थान से गिरकर 14वें स्थान पर चला गया– दीपेन्द्र हुड्डा

·        हमने हरियाणा को शिक्षा का हब बनाया, बीजेपी ने 12 साल में बेरोजगारी, अपराध नशाखोरी, महंगाई का हब बना दिया – दीपेन्द्र हुड्डा

·        हरियाणा की सरकारी शिक्षा व्यवस्था दमन दीव जैसे राज्य से भी गई गुजरी हालत में, प्रदेश में शिक्षा बजट का हजारों करोड़ रुपया आखिर किसकी जेब में जा रहा – दीपेन्द्र हुड्डा

·        हमारी सरकार ने प्रदेश में 2332 नये स्कूल बनवाये और अपग्रेड कराए, मॉडल स्कूल, किसान मॉडल स्कूल, आरोही मॉडल स्कूल खुलवाए– दीपेन्द्र हुड्डा

·        बीजेपी सरकार ने मर्जर का नाम देकर सरकार ने करीब 5000 स्कूलों को बंद कर दिया। अपने स्कूलों को बचाने के लिए बच्चों को धरने पर बैठना पड़ा– दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 1 जून। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा का शिक्षा तंत्र बर्बाद हो गया है। ये बात मैं नहीं कह रहा बल्कि बीजेपी की केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ताजा परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रिपोर्ट कह रही है। उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा HPSC, SSC में भर्ती के लिए लगाए गए गैर-हरियाणवी लोग कहते हैं कि उन्हें हरियाणा में काबिल युवा ही नहीं मिल रहे। दूसरी ओर, केंद्र की बीजेपी सरकार की रिपोर्ट बता रही है कि शिक्षा व्यवस्था के मामले में हरियाणा एक साल के अंदर ही राष्ट्रीय रैंकिंग में 8वें स्थान से फिसलकर 14वें स्थान पर चला गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की 2025 की परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रिपोर्ट ने हरियाणा में स्कूली शिक्षा की गिरती हालत की पोल खोल दी है। हालत यह है कि हरियाणा का सबसे बेहतर माना जाने वाला गुरुग्राम जिला भी सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन में पंजाब के सबसे निचले रैंक वाले पटियाला जिले से पीछे रह गया। दीपेन्द्र हुड्डा ने तंज़ कसा कि मुख्यमंत्री नायब सैनी इन दिनों हरियाणा से ज़्यादा पंजाब में ही रुचि रखते हैं।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था को लेकर आई भारत सरकार की नयी रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ताजा परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा की सरकारी शिक्षा व्यवस्था दमन दीव जैसे राज्य से भी गई गुजरी है। राज्य के हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। भारत सरकार के आंकड़ों में हरियाणा सरकार की नाकामी इस बात से उजागर होती है कि राष्ट्रीय रैंकिंग में इसमें महज एक साल में ही भारी गिरावट आई है। हरियाणा का कुल पीजीआई (PGI) स्कोर साल भर में ही 8वें स्थान से गिरकर सीधे 14वें स्थान पर चला गया। बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता और सीखने के नतीजे यानी ‘लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी’ में हरियाणा को 240 अंकों में से मात्र 79.9 अंक मिले हैं। जो यह दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बुरी तरह गिर चुका है और बच्चों का भविष्य अंधकार में है। स्कूल प्रबंधन और प्रशासनिक विफलता के मामले में हरियाणा को 130 में से बेहद निराशाजनक 47.1 अंक मिले जो यह साबित करता है कि शिक्षा विभाग पूरी तरह से नीतिगत पंगुता और अफसरशाही का शिकार है। रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के जिलों के बीच शैक्षिक असमानता की एक गहरी खाई देखने को मिल रही है। इससे सवाल उठता है कि प्रदेश में शिक्षा बजट का हजारों करोड़ रुपया आखिर किसकी जेब में जा रहा है क्योंकि लर्निंग आउटकम 240 में से 80 अंक भी पार नहीं हो पाया?

उन्होंने बीजेपी की शिक्षा विरोधी नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकार ने हरियाणा में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए प्रदेश में 2332 नये स्कूल बनवाये और अपग्रेड कराए। साथ ही मॉडल स्कूल, किसान मॉडल स्कूल, आरोही मॉडल स्कूल खुलवाए। लेकिन, मौजूदा सरकार ने कोई नया स्कूल खोलने के बजाय सैकड़ों सरकारी स्कूलों पर ताला लगा दिया और मॉडल स्कूलों का बंटाधार कर दिया। बीजेपी सरकार ने मर्जर का नाम देकर सरकार ने करीब 5000 स्कूलों को बंद कर दिया। अपने स्कूलों को बचाने के लिए बच्चों को धरने पर बैठना पड़ा। हुड्डा सरकार ने प्रदेश को शिक्षा का हब बनाने के लिए 27 नये विश्वविद्यालय बनवाए। अकेले शिक्षा महकमे में रिकॉर्ड 1 लाख से ज्यादा भर्ती करी थी। जिसमें JBT, PGT से लेकर लेक्चरर, प्रोफेसर, गेस्ट टीचर, कंप्यूटर टीचर शामिल हैं। लेकिन आज हरियाणा का शिक्षा विभाग अध्यापकों की भारी कमी से जूझ रहा है। मौजूदा बीजेपी सरकार ने बिना नयी भर्ती किये ही हजारों मंजूर पद ही खत्म कर दिये। आज भयंकर बेरोजगारी झेल रहे हरियाणा में 2 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हैं और जो भर्ती निकली भी वो या तो घोटाले की भेंट चढ़ गयी या पक्की भर्तियों को कौशल रोजगार निगम के जरिये कच्ची भर्ती में बदल दिया गया। एचपीएससी और एचएसएससी जैसी भर्ती संस्थाओं को को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। पिछले 12 साल में बीजेपी सरकार ने हरियाणा को बेरोजगारी, अपराध नशाखोरी, महंगाई का हब बना दिया है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने आगे बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बाढ़सा एम्स, एनसीआई, IIM, IIT, IIIT, केंद्रीय विश्वविद्यालय, डिफेंस यूनिवर्सिटी, आयुष विश्वविद्यालय समेत 15 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान और कैंपस स्थापित हुए। राजीव गांधी एजुकेशन सिटी की स्थापना हुई। 10 नए राजकीय विश्वविद्यालय स्थापित हुए। हुड्डा सरकार के दौरान कुल विश्वविद्यालयों की संख्या 8 से बढ़ाकर 42 की गई यानी 34 नये विश्वविद्यालय स्थापित किए गए। डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों की संख्या 3 से बढ़ाकर 27 की गई। 60 राजकीय महाविद्यालयों की संख्या को बढ़ाकर लगभग डबल 105 किया गया। इसी तरह तकनीकी संस्थानों की संख्या को 154 से बढ़ाकर 657 किया गया। प्रदेश में 5 नये मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए। आईटीआई की संख्या को 97 से बढ़ाकर 237 किया गया। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार सरकारी शिक्षा तंत्र को पूरी तरह से खत्म करने के लिये शिक्षा का निजीकरण करने पर तुली हुई है, ताकि गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर सके।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की PGI रैंकिंग रिपोर्ट प्रदेश में ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को बयान कर रही है। आज हालात यह हैं कि स्कूलों में ना पढ़ाने के लिए टीचर हैं और ना ही बच्चों के लिए आधारभूत सुविधाएं। प्रदेश के 538 स्कूलों मे लड़कियों के लिए टॉयलेट तक नहीं है। 1047 स्कूल ऐसे हैं जहां लड़कों के लिए भी टॉयलेट नहीं है। प्रदेश के 131 स्कूलों में पीने के पानी और 236 स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं है। 321 स्कूलों में चारदीवारी नहीं है। सूबे के स्कूलों में जरूरत के मुकाबले 8240 क्लास रूम और 5630 अन्य कमरों की कमी है। पिछले 12 सालों में बीजेपी सरकार ने स्कूलों को बंद करने, शिक्षकों की भर्ती रद्द करने, भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक कराने, पक्के पदों को खत्म करने का ही काम किया है।

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Author: Bharat Sarathi

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