बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई और भेदभाव से त्रस्त है जनता, कुंभकर्णी नींद सो रही बीजेपी- हुड्डा

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असिस्टेंड प्रोफेसर भूगोल भर्ती में फिर उजागर हुआ बीजेपी का हरियाणवी विरोधी चेहरा- हुड्डा

चंडीगढ़, 21 मई । पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि हरियाणा की जनता बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई और भेदभाव से त्रस्त है। बावजूद इसके बीजेपी सरकार कुंभकर्णी नींद सोई हुई है। हुड्डा पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर भूगोल की भर्ती में एकबार फिर इस सरकार का हरियाणवी विरोधी चेहरा उजागर हुआ है। क्योंकि सामान्य वर्ग की 116 नियुक्तियों में से 74 हरियाणा से बाहर के अभ्यर्थियों को भर्ती किया गया है।

इससे स्पष्ट है कि लगातार बीजेपी हरियाणा की नौकरियां अन्य राज्य के लोगों में बांट रही है। जबकि हरियाणा देश का सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाला राज्य है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने याद दिलाया कि भूगोल भर्ती से पहले असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी की भर्ती में भी सामान्य वर्ग के 60 चयनित अभ्यर्थियों में से 41 अन्य राज्यों के थे। इस भर्ती के रिजल्ट से साफ पता चलता है कि जानबूझकर अन्य राज्य के लोगों को इंटरव्यू में ज्यादा नंबर दिए गए और हरियाणा वालो को कम नंबर देकर मेरिट से बाहर कर दिया गया।

असिस्टेंट प्रोफेसर अंग्रेजी की 613 पदों वाली भर्ती में तो मात्र 151 अभ्यर्थियों का ही चयन किया गया और बाकी पद खाली छोड़ दिए गए। डीएससी वर्ग के साथ सबसे बड़ा अन्याय करते हुए 60 आरक्षित सीटों में से केवल एक का चयन किया गया था। इसी तरह असिस्टेंट प्रोफेसर साइकोलॉजी की भर्ती में 85 पदों के लिए 400 अभ्यर्थियों में से मात्र 3 को ही पास किया गया।

यानी ये सरकार साजिश के तहत या तो पदों को खाली छोड़ देती है और अगर भर्ती करती है तो उसमें ज्यादा से ज्यादा गैर-हरियाणवियों का चयन किया जाता है। यह सीधे तौर पर हमारे युवाओं के अधिकारों पर डाका है।

हुड्डा ने बढ़ती महंगाई पर भी चिंता जाहिर की। उन्हें कहा कि सरकार ने 15 मई को पेट्रोल-डीजल ₹3 प्रति लीटर और फिर 19 मई को करीब 90 पैसे महंगा कर दिया। तेल की कीमतें बढ़ने के चलते तमाम वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऊपर से गैस सिलेंडर के दामों में इजाफे ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। ऊपर से सितम ये है कि आने वाले दिनों में भी किसी तरह की राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

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Author: Bharat Sarathi

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