आज के विद्यार्थियों और युवाओं के हाथों में है भारत का भविष्य- सीजेआई सूर्यकांत

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*चरित्र और ईमानदारी ही सफलता का वास्तविक पैमाना है- राज्यपाल असीम घोष*

*चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय का पांचवा दीक्षांत समारोह*

*विश्वविद्यालय के 36 मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, 11 को पीएचडी तथा 408 विद्यार्थियों को प्रदान की गई यूजी एवं पीजी की डिग्री*

चण्डीगढ, 25 अप्रैल-  चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय परिसर के पांचवें दीक्षांत समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अध्यक्षता की तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, राज्यपाल की धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष भी मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। समारोह में राज्यपाल प्रो. घोष और मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विश्वविद्यालय के 36 मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, 11 को पीएचडी तथा 408 विद्यार्थियों को यूजी एवं पीजी की डिग्री प्रदान की।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए यह गर्व का अवसर है। भारत का भविष्य आज के विद्यार्थियों और युवाओं के हाथों में है। यदि युवा वर्ग चरित्रवान, शिक्षित और जिम्मेदार बनेगा तो देश नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित कर कड़ी मेहनत करनी चाहिए।

सीजेआई ने कहा कि सफलता केवल डिग्री प्राप्त करने से नहीं मिलती, बल्कि अनुशासन, मेहनत, निरंतर प्रयास और सीखने की क्षमता से प्राप्त होती है।   जीवन में आगे बढऩे के लिए समय का सदुपयोग, सकारात्मक सोच और कठिन परिश्रम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना, प्रमाण पत्र लेना या रोजगार हासिल करना नहीं है, बल्कि जिम्मेदार, संस्कारी और सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना है।

उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है, जो मनुष्य के चरित्र, आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाए। विद्यार्थियों की सफलता केवल परीक्षा परिणामों से नहीं आंकी जानी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि शिक्षा की प्रक्रिया में वे किस प्रकार के नागरिक बने हैं। ज्ञान के साथ अनुशासन, ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवा भावना भी आवश्यक है।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद और नेल्सन मंडेला जैसे महान व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने समाज को आत्मबल, नेतृत्व, समानता, साहस और राष्ट्र सेवा का मार्ग दिखाया। युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और क्षमता का उपयोग समाज, गांव, शहर, राज्य और देश के विकास में करना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में समर्पण, दूरदृष्टि और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। चौधरी बंसीलाल कर्मठता, ईमानदार कार्यशैली और जनसेवा की प्रेरणादायक मिसाल थे।

*ज्ञान एवं नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित विश्वविद्यलय – राज्यपाल*

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने विद्यार्थियों से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मजबूत नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान् करते हुए कहा कि चरित्र और ईमानदारी ही सफलता का वास्तविक पैमाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहें, राष्ट्र प्रथम की भावना को बनाए रखें और सदैव विनम्रतापूवर्क जमीन से जुड़े  रहें। एक महान राष्ट्र का नागरिक होना जहां गर्व की बात है, वहीं यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उल्लेखनीय प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक दशक से कुछ अधिक समय में यह उच्च शिक्षा का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। यह प्रगति हरियाणा की शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति और विकास के प्रति दृढ़ संकल्प का परिचायक है। अपनी समृद्ध विरासत और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों के साथ राज्य ज्ञान एवं नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है, जिसमें विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान करना एक शैक्षणिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इनमें से अधिकांश स्नातक छात्राएं हैं, जो महिला सशक्तिकरण और समावेशी एवं समान शिक्षा की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

भारत के विकास पथ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर दृढ़ता से अग्रसर है। उन्होंने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप और स्किल इंडिया जैसी पहलों को विकास, सशक्तिकरण और नए अवसरों के प्रमुख आधार बताया। उन्होंने विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों की भी सराहना की।

*उत्कृष्टता, नवाचार और मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ा रहा आगे -शिक्षा मंत्री*

समारोह में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि केवल उपाधियों का वितरण नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण के उत्सव का भी प्रतीक है। विश्वविद्यालय जिस प्रकार से उत्कृष्टता, नवाचार और मूल्य-आधारित शिक्षा को आगे बढ़ा रहा है, वह वास्तव में बहुत प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे समकालीन विषयों पर आयोजित व्याख्यान, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करना दर्शाता है कि यह विश्वविद्यालय न केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को समझता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी अपने विद्यार्थियों को तैयार कर रहा है। 

शिक्षा मंत्री ंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप समग्र विकास की बल दिया जा रहा है। महिला छात्र संसद का आयोजन महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर चर्चा बहुत ही प्रेरणादायक पहल है। इसी प्रकार अंतर-विश्वविद्यालय महिला फुटबॉल प्रतियोगिता में छात्राओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन, खेल प्रतिभा को भी दर्शाता है। पांच गांव को गोद लेकर साक्षरता, जीवन कौशल और स्वास्थय जागरूकता अभियान चलाना संस्थान की सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो सबका साथ और सबका विकास के मूल मंत्र को साकार भी करता है।

शिक्षा मंत्री ने आह्वान् किया कि छात्र-छात्राएं अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़े हैं। यह उपाधि आपके ज्ञान और परिश्रम का प्रमाण है, लेकिन इसके साथ ही समाज के प्रति आपकी जिम्मेदारी भी तय करती हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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