नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026 – महिला आरक्षण कानून से जुड़े नए संशोधन को लेकर लोकसभा में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। केंद्र सरकार द्वारा लाया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और सदन में गिर गया।
लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक संशोधन पारित करने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया, जिसके चलते विधेयक को मंजूरी नहीं दी जा सकी।
क्या था मामला?
यह विधेयक पहले से लागू नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्दी लागू करने और उससे जुड़े प्रावधानों (जैसे परिसीमन) में बदलाव से संबंधित था।
- सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता साफ हो
- लेकिन विपक्ष ने परिसीमन, जाति जनगणना और OBC आरक्षण जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए
🔹 सदन में क्या हुआ?
- बिल पर लंबी बहस हुई
- करीब 100 से ज्यादा सांसदों ने चर्चा में हिस्सा लिया
- लेकिन वोटिंग के दौरान आवश्यक बहुमत नहीं मिला
- नतीजतन संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका
क्या महिला आरक्षण कानून भी गिर गया?
👉 नहीं
यह समझना जरूरी है:
- 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून पहले से ही लागू है
- हाल ही में इसे प्रभावी भी घोषित किया गया है
- लेकिन यह जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा
राजनीतिक असर
- सरकार को सदन में संख्या बल की चुनौती का सामना करना पड़ा
- विपक्ष ने इसे “सरकार की रणनीतिक हार” बताया
- वहीं सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण पर सभी दल सहमत हैं, लेकिन तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी मतभेद हैं
निष्कर्ष
👉 लोकसभा में महिला आरक्षण कानून नहीं गिरा है
👉 बल्कि उससे जुड़ा नया संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया
👉 असली कानून अभी भी कायम है, लेकिन लागू होने में समय लगेगा








