नजरबंदी की कार्रवाई की एआईयूटीयूसी ने की कड़ी निंदा, सरकार पर दमनकारी रवैये का आरोप

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न्यूनतम मजदूरी और श्रमिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रस्तावित ज्ञापन से पहले कार्रवाई, एआईयूटीयूसी ने सरकार से नजरबंदी खत्म करने की उठाई मांग

गुड़गांव, 17 अप्रैल 2026: ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) की अखिल भारतीय कमेटी ने कॉमरेड विजय पाल सिंह (सदस्य, अखिल भारतीय सचिवमंडल एवं अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी, एआईयूटीयूसी) को 16-17 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित उनके निवास पर नजरबंद किए जाने की कड़ी निंदा की है और इसका पुरजोर विरोध जताया है।

संगठन ने इस कार्रवाई को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की दमनकारी और निरंकुश नीतियों का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

एआईयूटीयूसी के अनुसार, संगठन के आह्वान पर नोएडा के औद्योगिक श्रमिकों पर हो रही दमनकारी कार्रवाइयों के विरोध में ‘अखिल भारतीय एकजुटता दिवस’ मनाया जा रहा था। इस अवसर पर भारत के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन मुरादाबाद के श्रम उपायुक्त को सौंपा जाना प्रस्तावित था।

संगठन का आरोप है कि वर्ष 2019 से श्रमिकों को उनकी न्यायसंगत न्यूनतम मजदूरी और अन्य वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। इसी संदर्भ में प्रस्तावित ज्ञापन से घबराकर राज्य सरकार ने अलोकतांत्रिक कदम उठाते हुए कॉमरेड विजय पाल सिंह को नजरबंद कर दिया।

एआईयूटीयूसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस कार्रवाई को तुरंत वापस लिया जाए, कॉमरेड विजय पाल सिंह की नजरबंदी समाप्त की जाए तथा नोएडा सहित पूरे प्रदेश के श्रमिकों की जायज मांगों और समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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