क्या ट्रम्प ने दुख, पीड़ा और घृणा की एक अपरिवर्तनीय श्रृंखला को जन्म दिया है?

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

ईरान के साथ टकराव, होर्मुज खाड़ी की नाकेबंदी और वैश्विक दबाव के बीच अमेरिका की नीति सवालों के घेरे में—क्या ट्रम्प ने ‘पेंडोरा बॉक्स’ खोल दिया है?

— रामा तक्षक

राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान पर युद्ध झोंक कर, ओंधेमुँह गिर पड़ा है। इस्लामाबाद डील मेँ असफलता के बाद अमेरिका ने होर्मुज खाड़ी की नाकेबन्दी कर दी है। ईरान के द्वारा नाकेबन्दी तो पहले से ही है। अमेरिका की होर्मुज की नाकेबन्दी की पहल उसकी विवशता को भी दर्शाती है। अमेरिका चाहता है कि किसी भी तरह ईरान अमेरिका के सामने घुटने टेक दे।

अमेरिका से पहली सूचना आई थी कि इसका विकल्प ढ़ूँढ़ा जाएगा। दूसरे ही दिन होर्मुज की नाकेबन्दी कर दी गई। ट्रम्प का ट्वीट कर कहना है कि हम तेल के जहाजों को बमबारी कर ध्वस्त कर देंगे। ट्रम्प का यह कहना बहुत आसान है। ऐसा करना उसे भविष्य में भारी पड़ेगा। होर्मुज की खाड़ी में चलने वाले जहाज छोटी मोटी नौकाएँ नहीं हैं। फौरी तौर पर, तेल के जहाजों की पहचान करके उन्हें वापस जाने या आगे बढ़ने के लिए कहा जाएगा। अमेरिका केवल इतना ही कर सकता है।

इस समय तेल से भरे और होर्मुज की खाड़ी से निकल कर बाहर जाने वाले तेल के जहाजों की संख्या बहुत ही सीमित है। जिन खाली टैंकरों को ईरान जाना है या वे ईरान के टैंकर हैं, वे बहुत सोची समझी नीति अपनायेंगे। तेल के ये जहाज बहुत से देशों की अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ हैं। भारत और चीन जैसे देशों को अमेरिका का यह कदम फूटी आँखों नहीं सुहायेगा। अमेरिका द्वारा होर्मुज की नाकेबन्दी से समस्या के नये आयाम खुलेंगे और उन पर काबू पाना ट्रम्प की अकबकाहट में सामने आयेगा।

ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जाने की कोशिश में पूरा यूरोप एक होकर गुर्राने लगा था। इस गुर्राहट पर ट्रम्प के स्वर तुरंत बदल गए थे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्ट्रामर कह चुके हैं कि ;;ट्रम्प ट्रम्प’’ सुनते सुनते बहुत हो गया। अब हम अपने हितों को आगे रखकर नीति अपनायेंगे।

अमेरिका सैन्य बल के भरोसे होर्मुज खाड़ी की नाकेबंदी में सफल हो सकता है। लेकिन यह नाकेबंदी, नये सिरे से आर्थिक संकट की पहल है। इस नाकेबन्दी से अब अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में ईरान की ओर अंगुली उठना बंद हो जायेगी। राजनीतिक तौर पर यह ईरान की जीत है। साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में, होर्मुज खाड़ी की नाकेबंदी कर, राष्ट्रपति ट्रम्प अगली ठोकर खाने के लिए कदम बढ़ा रहे है। असल में ट्रम्प ने पंडोरा बॉक्स को खोल लिया है। अन्तर्राष्ट्रीय कानून के तहत इस तरह की नाकेबन्दी मानवाधिकार के विरुद्ध है। वैश्विक राजनीति में अमेरिका का यह कदम नया बवाल  पैदा करेगा। अभी इसके परिणामों का धुँधलका पर्दे के पीछे हो रही बातों में, राजनयिकों के मुँह पर छाया होगा।

ट्रम्प कह रहे हैं कि मैं बहुत हतोत्साहित हूँ कि नाटो आगे नहीं आया। नाटो के देश अमेरिका की सहायता के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। नाटो के देश आते तो होर्मुज की खाड़ी को जल्दी सुरक्षित किया जा सकता था। अब वे नहीं आ रहे हैं तो अमेरिका होर्मुज की खाड़ी में ईरानी माइंस को हटाकर सफाया करेंगे। इसमें बहुत अधिक समय नहीं लगेगा। राजनीतिक तौर पर यह बयानबाजी बड़ी उथली लगती है। ट्रम्प का यह बयान ईरान की माँद, होर्मुज की खाड़ी में फँसे शेर की गुर्राहट से अधिक नहीं है। ईरान इस तथ्य से भलीभाँति परिचित है। होर्मुज की खाड़ी में बिछाई गई ईरानी माइंस की सफाई कठिन काम है। अमेरिकी सेना को ईरान के ड्रोन और कन्धों पर ढ़ोकर चलाई जा सकने वाली मिसाइलों का सामना करना भारी पड़ेगा।

ईरान ने होर्मुज की खाड़ी में, वास्तव में माइंस बिछाई हुई हैं, इस बात का हालाँकि कोई सबूत नहीं है लेकिन ईरान का इतना कह भर देना कि खाड़ी में माइंस बिछाई हुई हैं, यह अमेरिका के सिर में दर्द करने के लिए काफी है। जो भी हो, अमेरिका के लिए इस स्थिति से एक दो सप्ताह में निपटना बहुत मुश्किल है। इस स्थिति में अमेरिका पर प्रतिदिन अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति का दबाव बढ़ेगा।

ट्रम्प की सारी राजनीति टेबल की राजनीति है। ट्रम्प की राजनीति है ’’मैं कहूँ वैसा ही घटे।’’ दुनिया भर के राजनेता ट्रम्प के इस व्यवहार को जाने अनजाने में झेल रहे हैं। ट्रम्प को राजनय का जमीनी ज्ञान नहीं है। वह सौदेबाजी व दादागिरी में माहिर है। दादागिरी में ईरान युद्ध के विषय में ट्रम्प ने बहुत बार कहा है कि हम जीत गये हैं। जब ट्रम्प की दादागिरी नहीं चलती तो उसकी जबान पर बौखलाहट भी जल्दी ही आ जाती है। राजनीति के खिलाड़ी इस जबान की लड़खड़ाहट को आसानी से भलीभाँति पहचानते हैं। अमेरिका में भी राष्ट्रपति ट्रम्प के सपोर्टर, ट्रम्प के मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगाने लगे हैं।

पंडोरा का पिटारा कहावत सदियों पुरानी है। ग्रीक पौराणिक कथाओं का रूपक पेंडोरा का बक्सा एक ऐसी कार्य दिशा को दर्शाता है जो बाहरी तौर पर तो निर्दोष  सा प्रतीत होता है लेकिन, पेंडोरा का पिटारा का मतलब है अप्रत्याशित दुख और दुर्भाग्य का पिटारा खोलना है। जब भी कोई ’’पेंडोरा का पिटारा’’ खोलता है तो वह दुख, पीड़ा और घृणा की एक अपरिवर्तनीय श्रृंखला को जन्म देता है। ट्रम्प ने इसी पिटारे में मुँह गड़ा दिया है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!