31 मार्च तक चेतावनी—फॉर्म जमा नहीं करने पर MIS पोर्टल होगा बंद, फीस बढ़ोतरी पर भी रोक
चंडीगढ़, 29 मार्च – हरियाणा प्रदेश के निजी स्कूलों में नियमों की अनदेखी का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य के कुल 9230 मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में से 6788 स्कूलों ने अब तक अपनी फीस और सुविधाओं का अनिवार्य ब्योरा यानी फॉर्म नंबर-6 जमा नहीं किया है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल 26.46 प्रतिशत स्कूलों ने ही इस नियम का पालन किया है, जबकि करीब 74 प्रतिशत स्कूल अब भी इससे दूर हैं।
इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को निर्देश जारी करते हुए स्कूलों को अंतिम चेतावनी दी गई है कि यदि 31 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक फॉर्म नंबर-6 ऑनलाइन जमा नहीं किया गया, तो संबंधित स्कूलों का मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (MIS) पोर्टल तुरंत बंद कर दिया जाएगा। पोर्टल बंद होने की स्थिति में स्कूलों की सभी ऑनलाइन प्रशासनिक प्रक्रियाएं, छात्रों का पंजीकरण और अन्य विभागीय कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे।
हरियाणा शिक्षा नियमावली के तहत प्रत्येक निजी स्कूल को नए शैक्षणिक सत्र में फीस बढ़ाने से पहले फॉर्म नंबर-6 भरना अनिवार्य होता है। इस फॉर्म में स्कूलों को अपनी कुल फीस संरचना, शिक्षकों का वेतन, उपलब्ध सुविधाएं—जैसे परिवहन, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब—और बैलेंस शीट का पूरा विवरण देना होता है। इसका उद्देश्य स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर रोक लगाना और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाना है। नियम के अनुसार, जो स्कूल यह फॉर्म जमा नहीं करते, वे संबंधित शैक्षणिक सत्र में फीस में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं कर सकते।
इसके बावजूद गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे जिलों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि कई स्कूलों ने फॉर्म-6 जमा किए बिना ही 10 से 15 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है। अभिभावकों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर स्कूल संचालक दाखिला प्रक्रिया के साथ-साथ भारी फीस वसूली का खेल चला रहे हैं।
हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मंच का कहना है कि जब तक फॉर्म-6 की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की फीस बढ़ोतरी को अवैध घोषित किया जाना चाहिए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।








