बजट में आंकड़ों की पारदर्शिता जरूरी, नहीं तो आमजन के साथ ठगी: वेदप्रकाश विद्रोही

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चंडीगढ़/रेवाडी, 21 फरवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन आने के बाद संसद और विधानसभाओं में प्रस्तुत बजट भाषणों के दौरान वास्तविक आंकड़ों को छिपाने की परंपरा शुरू हुई है, जिससे आमजन को बजट की सही तस्वीर नहीं मिल पाती।

विद्रोही ने कहा कि बजट के नाम पर सरकार जो प्रस्तुत कर देती है और मीडिया अपनी सुविधा अनुसार जो प्रमुख बिंदु दिखा देता है, उससे जनता को यह समझ ही नहीं आता कि वास्तव में प्रशासनिक खर्च कितना है और विकास कार्यों पर वास्तविक व्यय कितना किया जाएगा।

उन्होंने मांग की कि बजट भाषण के दौरान ही स्पष्ट रूप से बताया जाए कि—

  • कुल बजट में प्रशासनिक खर्च कितना है और किस विभाग में कितना है।
  • विकास कार्यों के लिए विभागवार कितनी राशि निर्धारित की गई है।
  • सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न मदों में वित्त वर्ष के दौरान कितनी राशि खर्च की जाएगी।

विद्रोही ने यह भी कहा कि बजट भाषण में यह जानकारी भी अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए कि पिछले वित्त वर्ष में किस विभाग को विकास और सामाजिक सुरक्षा के लिए कितनी राशि आवंटित की गई थी तथा वास्तव में धरातल पर कितना धन खर्च हुआ। इससे जनता को यह समझने में आसानी होगी कि सरकार के दावे और वास्तविक कार्यों में कितना अंतर है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों से जरूरी आंकड़ों को बजट भाषण में स्पष्ट रूप से न बताकर आमजन को भ्रमित किया जा रहा है। उनके अनुसार बजट में पारदर्शिता की कमी लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं के विपरीत है।

विद्रोही ने कहा कि जब तक सरकार विभागवार स्पष्ट और तुलनात्मक आंकड़े सार्वजनिक नहीं करेगी, तब तक आम नागरिक बजट के गुण-दोषों को समझ नहीं पाएगा और यह लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धांत के खिलाफ है।

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Author: Bharat Sarathi

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