एचपीवी टीकाकरण व मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक आयोजित

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एडीसी सोनू भट्ट ने 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं के टीकाकरण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए

आंगनवाड़ी, स्कूलों व ग्राम स्तर पर लाभार्थियों की पहचान कर व्यापक जागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए

गुरुग्राम, 6 फरवरी- एडीसी सोनू भट्ट की अध्यक्षता में जिले में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान को गति देने, नियमित प्रतिरक्षण कार्यक्रम को मजबूत बनाने तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों की समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागों को आपसी तालमेल के साथ निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

एडीसी सोनू भट्ट ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है और इसके लगभग 99 प्रतिशत मामले एचपीवी संक्रमण से जुड़े हैं। समय पर टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले की 15 वर्ष आयु वर्ग की सभी बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन की खुराक अनिवार्य रूप से दी जाए और अभियान के दौरान कोई भी पात्र लाभार्थी छूटने न पाए।

उन्होंने बताया कि ‘गार्डासिल-4’ वैक्सीन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर निर्धारित सत्रों में लगाई जाएगी। टीकाकरण के बाद लाभार्थियों की निगरानी की जाएगी तथा सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही अभिभावकों को टीके के लाभों के बारे में जागरूक कर भ्रांतियों को दूर करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग को वैक्सीन की उपलब्धता, कोल्ड-चेन प्रबंधन, प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती, एईएफआई प्रबंधन तथा नियमित टीकाकरण सत्रों के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर सर्वे कर लाभार्थियों की पहचान, लाइन लिस्टिंग और समुदाय स्तर पर जागरूकता गतिविधियां संचालित करेंगी।

शिक्षा विभाग को स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक बैठकों, जागरूकता कार्यक्रमों और सूचना सामग्री के माध्यम से किशोरियों व अभिभावकों को टीकाकरण के प्रति प्रेरित करने के निर्देश दिए गए। पंचायती राज विभाग ग्राम सभाओं और वीएचएसएनसी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार और मोबिलाइजेशन सुनिश्चित करेगा।

शहरी स्थानीय निकायों को स्वच्छता, फॉगिंग, जल निकासी और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में सहयोग देने के साथ शहरी बस्तियों में जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। वहीं आईएमए, एफओजीएसआई और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को चिकित्सकीय सहयोग, जागरूकता प्रसार तथा किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। उद्योग विभाग को औद्योगिक क्षेत्रों व श्रमिक परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में सहयोग देने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मातृ-शिशु (मेटरनिटी) स्वास्थ्य पर भी विशेष फोकस किया गया। एडीसी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर एएनसी जांच, टीडी टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, हाई-रिस्क गर्भावस्थाओं की पहचान तथा आपातकालीन रेफरल प्रणाली को मजबूत करना प्राथमिकता है। नवजात शिशुओं के पूर्ण टीकाकरण और पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

बैठक में सीएमओ डॉ लोकवीर, डिप्टी सीईओ जिला परिषद परमिंदर सिंह, डीआईओ डॉ. जयप्रकाश, डिस्ट्रिक्ट लेप्रोसी ऑफिसर डॉ. योगेन्द्र, डॉ रंजना एसएमओ डॉ. सुनीता यादव, यूएनओ डॉ. अपिला, डीटीओ डॉ. योगेन्द्र सिंह, मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहिणी, प्रोफेसर एम.एल. शर्मा, प्रिंसिपल जीएसएसएस ऊंचा माजरा विनीता तथा आयुष मेडिकल ऑफिसर डॉ. नीतू कटारिया उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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