हरियाणा कैबिनेट की बैठक आज : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में लिए अहम निर्णय

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आवासीय क्षेत्रों में हेल्थकेयर को बढ़ावा: हरियाणा ने रिहायशी प्लॉट में नर्सिंग होम के लिए पॉलिसी को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 2 फरवरी – आवासीय क्षेत्रों में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में  अहम निर्णय लेते हुए हरियाणा सरकार ने पूरे राज्य में लाइसेंसी रिहायशी प्लॉट वाली कॉलोनियों में नर्सिंग होम स्थापित करने के लिए एक व्यापक पॉलिसी को मंजूरी प्रदान की। इस पॉलिसी का उद्देश्य रिहायशी इलाकों में मौजूदा हेल्थ केयर की कमियों को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि निवासियों को उनके घर-द्वार के आस-पास ज़रूरी मेडिकल सेवाएं उपलब्ध हो। 

पॉलिसी के तहत, पूरे राज्य में लाइसेंसी कॉलोनियों के रिहायशी प्लॉट पर नर्सिंग होम स्थापित करने की इजाज़त ज़रूरी कन्वर्ज़न चार्ज के भुगतान के बाद ही दी जाएगी। ऐसी इजाज़त सिर्फ़ उन योग्य डॉक्टरों (एलोपैथिक/आयुष) के मालिकाना हक वाले रिहायशी प्लॉट पर दी जाएगी, जिनके पास मेडिकल काउंसिल या आयुष काउंसिल के साथ एक वैध रजिस्ट्रेशन नंबर है, जो अभी प्रैक्टिस कर रहे हैं, और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की स्थानीय ब्रांच में रजिस्टर्ड हैं। आवेदन के साथ उन्हें इस संबंध में एक हलफनामा देना अनिवार्य होगा।

नर्सिंग होम व्यापक मेडिकल, सामाजिक और व्यक्तिगत देखभाल प्रदान करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं, बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी और विशेष सेवाओं की बढ़ती मांग के साथ, हर सेक्टर में इनकी स्थापना जरूरी हो गई है। जबकि 2018 के दिशानिर्देशों में हर 50 एकड़ में 1,000 वर्ग मीटर के दो नर्सिंग होम का प्रावधान है, हाइपर पोटेंशियल जोन में भी रिहायशी प्लॉट वाली कॉलोनियों के लिए एरिया के नियमों को 100 से घटाकर 25 एकड़ करने से आवंटन मुश्किल हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की मांग पर विचार करने और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, कैबिनेट ने मंज़ूर विकास योजनाओं के अनुसार, रिहायशी ज़ोन में लाइसेंसी कॉलोनियों में रिहायशी प्लॉट पर नर्सिंग होम की इजाज़त देने वाली पॉलिसी को मंज़ूरी दी।

एरिया और पहुंच के नियम

पॉलिसी के नियमों के अनुसार, हाइपर और हाई पोटेंशियल ज़ोन के लिए न्यूनतम प्लॉट का आकार 350 वर्ग गज तय किया गया है, जबकि मीडियम और लो पोटेंशियल ज़ोन के लिए यह 250 वर्ग गज होगा। ऐसी जगहों पर सिर्फ़ सेक्टर या मुख्य सड़कों के किनारे सर्विस रोड पर ही इजाज़त दी जाएगी, और इजाज़त विशेष रूप से लाइसेंसी प्लॉट वाली कॉलोनियों के रिहायशी प्लॉट पर दी जाएगी जहां सभी आंतरिक सेवाएं बिछाई जा चुकी हैं और कंप्लीशन या पार्ट-कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए जा चुके हैं। सेक्टर को बांटने वाली सड़कों से सटी या उनके किनारे वाली सर्विस सड़कों पर सिर्फ़ एक साइट की इजाज़त होगी, और एक सेक्टर में ज़्यादा से ज़्यादा चार ऐसी साइट्स की इजाज़त होगी। सभी परमिशन 10 नवंबर, 2017 की पॉलिसी के अनुसार ही दी जाएंगी।

लागू फीस और शुल्क

प्रॉपर्टी के पोटेंशियल ज़ोन के आधार पर रेजिडेंशियल प्लॉट के मालिकों के लिए तय फीस में हाइपर ज़ोन के लिए 10,000 रुपये प्रति वर्ग गज, हाई ज़ोन के लिए 8,000 रुपये प्रति वर्ग गज, मीडियम ज़ोन के लिए 6,000 रुपये प्रति वर्ग गज, और लो ज़ोन के लिए 4,000 रुपये प्रति वर्ग गज शामिल हैं। एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेस (EDC) सहित कोई अन्य फीस लागू नहीं होगी।

हरियाणा मंत्रिमण्डल ने स्क्रूटनी फीस, लाइसेंस फीस और इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में बदलाव को दी मंज़ूरी

चंडीगढ़, 2 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 तथा हरियाणा अनुसूचित सड़कें तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के तहत निर्धारित विभिन्न वैधानिक फीस और शुल्कों में संशोधन के लिए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।

कैबिनेट के इस फैसले से दोनों नियमों के संबंधित शेड्यूल में संशोधन का मार्ग प्रशस्त हो गया है ताकि मौजूदा फीस संरचना को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और शहरी विकास की ज़रूरतों के अनुरूप तर्कसंगत और अद्यतन किया जा सके।

मंज़ूर किए गए प्रस्ताव में हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 के तहत स्क्रूटनी फीस, लाइसेंस फीस, राज्य अवसंरचना विकास   शुल्क  (एसआईडीसी), अवसंरचना संवर्धन शुल्क (आईएसी) और आईएसी-टीओडी में संशोधन शामिल है। इसके अतिरिक्त, साथ ही हरियाणा हरियाणा अनुसूचित सड़कें तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के तहत जांच शुल्क और परिवर्तन शुल्क में भी बदलाव किया गया है।

इनमें से अधिकाश फीस और शुल्कों में कई वर्षों से कोई संषोधन नहीं किया गया था। ऐसे में शहरी बुनियादी ढ़ाचें के लिए पर्याप्त राजस्व सुनिश्चित करने और बढ़ती विकास लागत के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए इन दरों में  संशोधन आवश्यक हो गया था।

संशोधित दरें एक तर्कसंगत आधार पर प्रस्तावित की गई हैं, जिससे लाइसेंस देने के लिए संशोधित फीस और शुल्कों के कारण सरकारी खजाने की राजस्व प्राप्ति में 22-25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

चंडीगढ़, 2 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 तथा हरियाणा अनुसूचित सड़कें तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के तहत निर्धारित विभिन्न वैधानिक फीस और शुल्कों में संशोधन के लिए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।

कैबिनेट के इस फैसले से दोनों नियमों के संबंधित शेड्यूल में संशोधन का मार्ग प्रशस्त हो गया है ताकि मौजूदा फीस संरचना को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और शहरी विकास की ज़रूरतों के अनुरूप तर्कसंगत और अद्यतन किया जा सके।

मंज़ूर किए गए प्रस्ताव में हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 के तहत स्क्रूटनी फीस, लाइसेंस फीस, राज्य अवसंरचना विकास   शुल्क  (एसआईडीसी), अवसंरचना संवर्धन शुल्क (आईएसी) और आईएसी-टीओडी में संशोधन शामिल है। इसके अतिरिक्त, साथ ही हरियाणा हरियाणा अनुसूचित सड़कें तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के तहत जांच शुल्क और परिवर्तन शुल्क में भी बदलाव किया गया है।

इनमें से अधिकाश फीस और शुल्कों में कई वर्षों से कोई संषोधन नहीं किया गया था। ऐसे में शहरी बुनियादी ढ़ाचें के लिए पर्याप्त राजस्व सुनिश्चित करने और बढ़ती विकास लागत के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए इन दरों में  संशोधन आवश्यक हो गया था।

संशोधित दरें एक तर्कसंगत आधार पर प्रस्तावित की गई हैं, जिससे लाइसेंस देने के लिए संशोधित फीस और शुल्कों के कारण सरकारी खजाने की राजस्व प्राप्ति में 22-25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

हरियाणा एंटरप्राइज प्रमोशन रूल्स 2016 में संशोधन को कैबिनेट ने दी मंज़ूरी

चंडीगढ़, 2 फरवरी-मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में हरियाणा एंटरप्राइज प्रमोशन रूल्स 2016 में संशोधनों को मंज़ूरी दी गई। अब संयुक्त निदेशक/उप निदेशक, जिला एमएसएमई केंद्र को जिला स्तरीय क्लीयरेंस समिति (डीएलसीसी) के सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

राज्य सरकार ने हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन एक्ट, 2016 और संबंधित नियम बनाए हैं, ताकि एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया जा सके, ताकि राज्य में व्यापार करने में आसानी हो। साथ ही यह अच्छे मानकों के बराबर हो। ऐसा इसलिए किया गया है जिससे राज्य में व्यापार करने में होने वाली किसी भी प्रकार की देरी और लागत को कम किया जा सके।

हरियाणा एंटरप्राइज प्रमोशन बोर्ड (HEPB) का गठन हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन एक्ट, 2016 की धारा 3 के तहत किया गया है। सशक्त कार्यकारी समिति (EEC) का गठन उक्त अधिनियम की धारा 4 के तहत किया गया है और उक्त अधिनियम की धारा 8 के प्रावधानों के अनुसार राज्य के हर जिले में जिला स्तरीय क्लीयरेंस समिति (DLCC) का गठन किया गया है।

गौरतलब है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) विभाग का गठन एमएसएमई और छोटे व्यवसायों को सक्रिय रूप से समर्थन, सलाह और सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया है, ताकि उद्यमिता से संबंधित सभी जानकारियों और व्यावसायिक बुद्धिमत्ता से संबंधित कमियों को दूर किया जा सके, उनकी व्यावसायिक चुनौतियों का समाधान किया जा सके। साथ ही शिकायतों का तेजी से समाधान सुनिश्चित किया जा सके और तर्कसंगत नीति निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। राज्य के हर जिले में जिला एमएसएमई केंद्र कार्यरत है। एमएसएमई विभाग की कई योजनाओं को भी डीएलसीसी द्वारा समय-समय पर मंज़ूरी दी जाती है।

हरियाणा कैबिनेट ने मौजूदा एमएसएमईज़ और अनधिकृत औद्योगिक क्लस्टर्स को लाभ पहुंचाने हेतु एचईईपी-2020 में संशोधनों को दी मंजूरी

चण्डीगढ़, 2 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति (एचईईपी)-2020 तथा इससे संबंधित 16 प्रोत्साहन योजनाओं में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई। यह निर्णय राज्य में कार्यरत मौजूदा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमईज) को सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा बजट 2025-26 में की गई घोषणा के अनुरूप है तथा इसका उद्देश्य अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर संचालित औद्योगिक इकाइयों को लंबे समय से आ रही व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान करना है।

मंत्रिमंडल ने निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू)/अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) से छूट के प्रावधान को मंजूरी दी है। इस व्यवस्था के अंतर्गत कम से कम 50 उद्यमी, जिनकी औद्योगिक इकाइयाँ न्यूनतम 10 एकड़ की सतत भूमि पर स्थित हैं, एक निर्दिष्ट सरकारी पोर्टल के माध्यम से सामूहिक रूप से नियमितीकरण हेतु आवेदन कर सकेंगे। ऐसी इकाइयों ने ]1 जनवरी, 2021 से पूर्व वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया होना चाहिए। आवेदन पर अंतिम निर्णय होने तक, इन इकाइयों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से अस्थायी रूप से नियमित माना जाएगा।

कैबिनेट ने एचईईपी-2020 के धारा 14.14 में भी संशोधन को मंजूरी दी है, जिसके अंतर्गत हरियाणा ग्रामीण औद्योगिक विकास योजना के तहत संचालित ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमों के अतिरिक्त पात्र मौजूदा एमएसएमई क्लस्टर्स को भी स्पष्ट रूप से सीएलयू/एनओसी छूट का लाभ प्रदान किया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने मौजूदा एमएसएमईज के लिए अनिवार्य सीएलयू/एनओसी की शर्त को समाप्त करने के उद्देश्य से एचईईपी-2020 के अंतर्गत संचालित 16 प्रमुख प्रोत्साहन योजनाओं में आवश्यक संशोधनों को भी    स्वीकृति दी है। इनमें एसएमई एक्सचेंज, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण, परीक्षण उपकरण, बाजार विकास, पेटेंट पंजीकरण, ऊर्जा एवं जल संरक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन, नेट एसजीएसटी के बदले निवेश सब्सिडी, क्रेडिट रेटिंग, सुरक्षा अनुपालन, अनुसंधान एवं विकास, बिना गारंटी क्रेडिट गारंटी, प्रौद्योगिकी उन्नयन हेतु ब्याज सब्सिडी, माल ढुलाई सहायता तथा औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकास से संबंधित योजनाएं शामिल हैं। इन संशोधनों के बाद पात्र मौजूदा उद्यम बिना अतिरिक्त अनुपालन बाधाओं के इन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।

कार्यान्वयन में स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट ने ‘‘मौजूदा उद्यम’’ तथा ‘‘नया सूक्ष्म उद्यम’’ की सटीक परिभाषाओं को भी मंजूरी दी है। इसके अनुसार, वह इकाई जिसने 1 जनवरी, 2021 से पूर्व वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया है, उसे मौजूदा उद्यम माना जाएगा, जबकि वह सूक्ष्म उद्यम जिसने 1 जनवरी, 2021 के बाद और 31 दिसंबर, 2025 से पूर्व उत्पादन प्रारंभ किया है, उसे नया सूक्ष्म उद्यम की श्रेणी में रखा जाएगा।

कैबिनेट ने हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2018 में संशोधनों को मंजूरी दी

ग्रुप डी भर्ती 100% CET अंकों पर आधारित होगी

चंडीगढ़, 2 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में हाल के न्यायिक फैसलों के अनुसार हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2018 की दूसरी अनुसूची में संशोधनों को मंजूरी दी गई है।

खास बात यह है कि ग्रुप डी कर्मचारियों के चयन में सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के लिए 5 प्रतिशत वेटेज का पहले का प्रावधान माननीय सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ माननीय पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने संबंधित मामलों में रद्द कर दिया था। इन फैसलों को देखते हुए और कानूनी निरंतरता सुनिश्चित करने और भविष्य में मुकदमों से बचने के लिए अधिनियम की दूसरी अनुसूची में संशोधन करना आवश्यक हो गया था।

तदनुसार, कैबिनेट ने अधिनियम की धारा 26 के तहत मौजूदा दूसरी अनुसूची को बदलने की मंजूरी दी। संशोधित मानदंड अब यह बताता है कि ग्रुप डी पदों (उन पदों को छोड़कर जहां न्यूनतम योग्यता मैट्रिक से कम है) पर चयन पूरी तरह से कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) पर आधारित होगा, जिसमें सीईटी अंकों को 100 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा।

संशोधित अनुसूची में यह भी बताया गया है कि ग्रुप डी पदों के लिए सीईटी सिलेबस में दो घटक होंगे।  इनमें एक , सामान्य जागरूकता, तर्क, कवांटिटेटिवे एबिलिटी, अंग्रेजी, हिंदी और संबंधित विषयों को 75 प्रतिशत वेटेज, और दूसरा हरियाणा से संबंधित  विषयों जैसे इतिहास, करंट अफेयर्स, साहित्य, भूगोल, पर्यावरण और संस्कृति को 25 प्रतिशत वेटेज दी जाएगी। प्रश्न पत्र मैट्रिक स्तर के मानक का ही रहेगा।

उन उम्मीदवारों के लिए जिन्होंने 12 जनवरी, 2024 को ग्रुप डी पदों की सीईटी लिखित परीक्षा पहले ही पास कर ली है, जो  11 जनवरी, 2027 तक वैध है, और जो उम्मीदवार निकट भविष्य में पास करेंगे, पिछले उम्मीदवारों द्वारा 95 अधिकतम अंकों में से प्राप्त अंकों को सीईटी पास उम्मीदवारों की संयुक्त मेरिट सूची के उद्देश्य से प्रतिशत में बदला जाएगा।

शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रस्ताव को मंज़ूरी

चंडीगढ़, 2 फरवरी – हरियाणा कैबिनेट की बैठक आज मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई, जिसमें शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई, जिसमें प्रांतीय सरकार की जमीन को नगर परिषद पलवल को “पार्किंग स्थल और नगर परिषद पलवल के ऑफिसर-कम-कमर्शियल कॉम्प्लेक्स” के निर्माण के लिए वर्तमान कलेक्टर रेट की दरों पर ट्रांसफर किया जाएगा।

प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2024-25 का कलेक्टर रेट 11.550 रुपये प्रति वर्ग गज था। इस तरह, एसडीएम आवास के पास स्थित 9944 वर्ग गज ज़मीन की कीमत राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 19 जनवरी, 2021 को जारी पॉलिसी के अनुसार 11,48,53.200 रुपये होगी।

इस संबंध में, नगर परिषद पलवल ने इस प्रस्ताव के लिए जमीन को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव 18 जुलाई, 2018 को ही पास कर दिया था।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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