बजट 2026-27 @ विज़न 2047 : लोकलुभावन राजनीति से आगे, आत्मनिर्भर विकसित भारत की वैश्विक रूपरेखा

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बजट आते ही शेयर बाज़ार और सोना-चांदी लुढ़के, लेकिन सरकार का संदेश साफ—

शॉर्ट टर्म पॉपुलिज़्म नहीं, लॉन्ग टर्म आर्थिक अनुशासन ही प्राथमिकता

– एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

गोंदिया। भारत का आम बजट 2026 किसी चुनावी वर्ष की तात्कालिक लोकप्रियता के लिए गढ़ा गया दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे राष्ट्र की आत्मविश्वासी घोषणा है जो अब अपने विकास की दिशा स्वयं तय करना चाहता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह बजट न तो भावनात्मक नारों से भरा है और न ही तात्कालिक राहतों की चकाचौंध में उलझा हुआ।

हालांकि बजट पेश होते ही शेयर बाज़ार में तेज गिरावट देखी गई और सोना-चांदी के दाम भी धड़ाम से नीचे आ गए। बीते एक-दो हफ्तों में की गई तेजी एक ही दिन में साफ हो गई। बाज़ार की यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि बजट ने त्वरित लाभ की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया।
लेकिन इसके विपरीत, मेरा स्पष्ट मत है कि बजट 2026 भारत को अगले दो दशकों में एक आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की ठोस रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

बजट की संरचना में वैचारिक बदलाव

75 वर्षों से चली आ रही बजट प्रस्तुति की परंपरा में इस बार एक सूक्ष्म लेकिन अर्थपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। पहले भाग ‘ए’ में आर्थिक दृष्टिकोण और भाग ‘बी’ में कर घोषणाएं होती थीं, लेकिन बजट 2026 में आर्थिक दर्शन और नीतिगत फैसलों को एक निरंतर कथा में पिरोया गया है।

यह संकेत है कि सरकार अब कर नीति, पूंजी निवेश, तकनीकी मिशन और सामाजिक ढांचे को अलग-अलग खांचों में नहीं, बल्कि एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के उपकरण के रूप में देख रही है। पेपरलेस बजट और डिजिटल प्रस्तुति इस बदलते शासन-स्वरूप का प्रतीक है।

लोकलुभावनवाद नहीं, दीर्घकालिक अनुशासन

यह बजट ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई-चेन पुनर्संरचना और कर्ज़ दबाव से जूझ रही है। अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, यूरोप की ऊर्जा चुनौतियां और उभरते बाज़ारों की अनिश्चितता के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह शॉर्ट-टर्म लोकलुभावनवाद के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक अनुशासन को चुनेगा।

वित्त मंत्री के 90 मिनट के भाषण में निरंतरता, स्थिरता और भविष्य दृष्टि की स्पष्ट झलक मिली। चौंकाने वाली घोषणाओं की अनुपस्थिति कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीतिक परिपक्वता का संकेत है।

कैपेक्स आधारित विकास की रीढ़

बजट 2026 का केंद्रीय तत्व है—कैपेक्स ड्रिवन ग्रोथ
वित्तवर्ष 2027 के लिए 13.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय, जो पिछले वर्ष से लगभग 9 प्रतिशत अधिक है, सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और शहरी विकास में यह निवेश रोजगार सृजन के साथ निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा।

आर्थिक इतिहास गवाह है कि सरकारी कैपेक्स का मल्टीप्लायर प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था में फैलता है—और यही इस बजट की मूल रणनीति है।

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: आत्मनिर्भरता की कुंजी

लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 यह स्पष्ट करता है कि भारत अब केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहना चाहता। सेमीकंडक्टर आज राष्ट्रीय सुरक्षा, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और भू-राजनीतिक शक्ति का प्रतीक हैं।
यह पहल भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय सेमीकंडक्टर हब बना सकती है।

हाई-स्पीड रेल और फ्रेट कॉरिडोर

मुंबई–पुणे, हैदराबाद–बेंगलुरु और दिल्ली–वाराणसी जैसे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर केवल परिवहन परियोजनाएं नहीं, बल्कि आर्थिक विकास गलियारे हैं।
साथ ही, ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर और रेयर अर्थ कॉरिडोर भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और रणनीतिक संसाधनों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।

एमएसएमई, बायोफार्मा और कर सुधार

10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड यह स्वीकार करता है कि भारत की आर्थिक रीढ़ एमएसएमई हैं।
वहीं, बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत प्रस्तावित निवेश भारत को वैश्विक स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला में और मजबूत करेगा।

कर सुधारों में सरलता, पारदर्शिता और ट्रस्ट-बेस्ड टैक्सेशन पर जोर निवेशकों और करदाताओं दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है।

ग्रीन ग्रोथ और संतुलित शहरीकरण

कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी, सिटी इकोनॉमिक रीजन और जलमार्ग विकास की योजनाएं यह दिखाती हैं कि बजट विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधने का प्रयास करता है। विकास अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा।

निष्कर्ष

समग्र रूप से देखा जाए तो बजट 2026-27 किसी लोकलुभावन कथा का विस्तार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दीर्घकालिक रणनीति है।
यह बजट भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार, अनुशासित और दूरदर्शी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है—जो आज के लाभ के लिए कल को गिरवी नहीं रखती, बल्कि भविष्य की नींव वर्तमान में ही मजबूत करती है।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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Author: Bharat Sarathi

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