3600 एकड़ बावल भूमि का मुआवजा अवार्ड जारी होने के बाद अधिग्रहण रद्द करने पर उठे गंभीर सवाल
परियोजना को बावल से नारनौल ले जाकर किसानों को कम मुआवजा देने के आरोप, दोहरे घोटाले का दावा
पंजाब–हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में दोनों मामलों की जांच की मांग
रेवाड़ी/नारनौल | 21 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अहीरवाल क्षेत्र में प्रस्तावित मल्टी स्पेशलिटी लॉजिस्टिक हब परियोजना को लेकर भाजपा सरकार पर बड़े घोटाले के आरोप लगाए हैं। विद्रोही का कहना है कि हरियाणा में सत्ता में आते ही भाजपा ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया।
विद्रोही के अनुसार, मूल रूप से यह परियोजना बावल में आईएमटी से सटी करीब 3600 एकड़ भूमि पर विकसित होनी थी। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भूमि अधिग्रहण की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूर्ण कर मुआवजा अवार्ड भी घोषित हो चुका था। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के महज एक पखवाड़े के भीतर ही तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने अचानक इस भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया।
उन्होंने सवाल उठाए—
- मुआवजा वितरण के समय अधिग्रहण रद्द करने की जरूरत क्यों पड़ी?
- इस फैसले से किसे लाभ पहुंचा?
- क्या यह निर्णय किसी लेन-देन का परिणाम था?
विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा पिछले 11 वर्षों से भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार पर भूमि अधिग्रहण को लेकर आरोप लगाती रही है, जबकि वास्तविक घोटाला तो तब हुआ जब पूरी प्रक्रिया और अवार्ड के बाद भी बावल की 3600 एकड़ भूमि का अधिग्रहण रद्द किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक कमजोरी के कारण इस निर्णय को बड़ा मुद्दा नहीं बनाया गया और न ही इसके पीछे छिपे कथित घोटाले की जांच की मांग उठी। इसके उलट, भाजपा ने कांग्रेस सरकार के समय अंतिम कानूनी कार्यवाही से पहले कुछ भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने को भ्रष्टाचार बताकर राजनीतिक लाभ उठाया।
विद्रोही ने आगे बताया कि बावल से परियोजना नारनौल स्थानांतरित की गई, जहां अब वहां के ग्रामीण भी कम मुआवजा देने के आरोप लगा रहे हैं। उनका दावा है कि भाजपा सरकार ने लॉजिस्टिक हब के नाम पर दो बार घोटाला किया—पहला बावल में अधिग्रहण रद्द कर और दूसरा नारनौल में किसानों को कम मुआवजा देकर।
जांच की मांग
वेदप्रकाश विद्रोही ने मांग की कि बावल में भूमि अधिग्रहण रद्द करने और नारनौल में मुआवजा वितरण से जुड़े आरोपों की जांच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने आशंका जताई कि दोनों मामलों में सत्ता के दुरुपयोग से भाजपा-संघ से जुड़े लोगों ने “मोटा माल” बनाया है।







