— अहीरवाल के विकास पर श्वेत पत्र जारी करने की भाजपा नेताओं को खुली चुनौती
रेवाडी/गुरुग्राम | 15 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने सत्तारूढ़ भाजपा और अहीरवाल से जुड़े उसके नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास और जनसरोकारों से जुड़े सवालों से भागने के लिए भाजपा नेता लगातार विगत कांग्रेस सरकारों पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही निभाने के बजाय भाजपा नेता अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।
विद्रोही ने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस पर अहीरवाल की उपेक्षा का आरोप लगाने वाले अनेक नेता स्वयं लंबे समय तक कांग्रेस सत्ता में भागीदार रहे और सत्ता के सुख का आनंद लेते रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में कांग्रेस ने अहीरवाल के साथ अन्याय किया था, तो ये नेता उस समय कांग्रेस से अलग होकर क्षेत्र के हितों की लड़ाई लड़ने सामने क्यों नहीं आए?
उन्होंने कहा कि केंद्र और हरियाणा में बीते 12 वर्षों से भाजपा की सरकार होने के बावजूद अहीरवाल का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। इसके बावजूद भाजपा नेता अपनी नाकामी स्वीकार करने के बजाय पूर्व कांग्रेस सरकारों को कटघरे में खड़ा कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। विद्रोही के अनुसार, किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए 12 वर्ष का समय पर्याप्त होता है, लेकिन भाजपा ने इस अवधि में सत्ता का आनंद लेने और संसाधनों की लूट के अलावा कुछ नहीं किया।
वेदप्रकाश विद्रोही ने अहीरवाल से निर्वाचित भाजपा जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें सचमुच ईमानदारी और क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता है, तो वे विगत कांग्रेस शासन के दौरान अहीरवाल के 11 विधानसभा क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों और भाजपा शासन के पिछले 11 वर्षों के विकास कार्यों की तुलना करता हुआ एक श्वेत पत्र जारी करें। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस शासनकाल में कितना वास्तविक विकास हुआ।
उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में विकास और जनसुविधाओं का जो बुनियादी ढांचा आज मौजूद है, उसका अधिकांश निर्माण वर्ष 2014 से पहले हुआ था। भाजपा शासन में उसमें मात्र 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि भाजपा जुमलेबाजी, झूठे दावे और जातीय व साम्प्रदायिक उन्माद फैलाकर अहीरवाल की जनता को ठगने का काम कर रही है।
विद्रोही ने कहा कि विगत एक दशक में भाजपा ने अहीरवाल के विकास और जनसरोकारों की घोर उपेक्षा की है, जो किसी भी निष्पक्ष तुलनात्मक विकास श्वेत पत्र में पूरी तरह उजागर हो जाएगी।







