युवा दिवस हमें आत्मकेंद्रित नहीं, राष्ट्रकेंद्रित सोच अपनाने का आह्वान करता है :  मोहन लाल बड़ौली

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चंडीगढ़, 12 जनवरी। मोदी जी के नेतृत्व में निरन्तर भारत देश का ऊर्जावान युवा हर एक क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए नया इतिहास रच रहा हैं। अगर युवा का उल्टा किया जाए तो वायु होता है और वायु का मतलब पवन होता हैं , वही अगर पवन से तात्पर्य निकाला जाए तो पवनपुत्र हनुमान होता हैं। देश का युवा बहुत ही निष्ठावान और ऊर्जावान है केवल उसे जामवंत की तरह जगाने की आवश्यकता हैं। जो काम मोदी जी के मार्गदर्शन में बखूबी किया जा रहा हैं। आज देश के राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास की याद है। यह दिन हर वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाता है, जो स्वामी विवेकानंद की जयंती है। वर्ष 2026 में जब देश तेज़ी से भविष्य की ओर बढ़ रहा है, तब युवा दिवस हमें ठहरकर यह सोचने को मजबूर करता है, क्या आज का युवा चरित्रवान, साहसी और जिम्मेदार बन पा रहा है?

स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि यदि युवाओं में आत्मबल और अनुशासन हो, तो भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी 2026 (सोमवार) को मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को उनके विचारों से जोड़ना और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना था। स्वामी विवेकानंद केवल संत नहीं, बल्कि युवाओं के मार्गदर्शक थे। उनका प्रसिद्ध मंत्र, “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”। आज भी हर युवा के लिए दिशा दिखाने वाला दीपक है। उनका जीवन युवाओं को आत्मविश्वास, साहस और सेवा का पाठ पढ़ाता है, इसलिए उनकी जयंती को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी। राष्ट्रीय युवा दिवस उसी गौरवशाली विरासत की याद दिलाता है। इस दिन देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भाषण, युवा सम्मेलन, वाद-विवाद और प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हर वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जो समय की चुनौतियों शिक्षा, रोजगार, नवाचार, मानसिक मजबूती और सामाजिक जिम्मेदारी पर केंद्रित होती है। यह थीम युवाओं को केवल सपने देखने नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने की प्रेरणा देती है।आज के डिजिटल और तेज़ रफ्तार दौर में युवा दिवस हमें याद दिलाता है कि सफलता केवल सुविधा से नहीं, बल्कि संघर्ष और अनुशासन से मिलती है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आराम नहीं, बल्कि शक्ति का संदेश दिया। युवा दिवस हमें आत्मकेंद्रित नहीं, राष्ट्रकेंद्रित सोच अपनाने का आह्वान करता है।

स्वामी विवेकानंद ने युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश दिए थे। उनका मानना था कि स्वयं पर विश्वास सफलता की पहली सीढ़ी है। उन्होंने युवाओं के जोश और मेहनत को देश की प्रगति का आधार बताया। सेवा और मानवता को उन्होंने सबसे बड़ा धर्म कहा।उनका संदेश था कि जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए तब तक प्रयास नहीं रोकना चाहिए। उन्होंने युवाओं को निर्भय और साहसी बनने की प्रेरणा दी। उनके विचारों ने स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण दोनों को प्रभावित किया। आज भी देश के शैक्षणिक संस्थान उनके विचारों को पढ़ाते हैं।स्वामी विवेकानंद युवाओं के सच्चे मार्गदर्शक थे। स्वामी जी ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से समाज सेवा का मार्ग दिखाया। युवाओं को भारतीय अध्यात्म और अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य किया। उनके विचार युवाओं के भीतर कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना जागृत करते हैं। उन्होंने भारत के प्राचीन दर्शन और ज्ञान को पूरी दुनिया तक पहुंचाने में अद्वितीय भूमिका निभाई। उनके विचार आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रकाश स्तंभ बने हुए हैं। आज राष्ट्रीय युवा दिवस को ऐतिहासिक बनाते हुए हरियाणा में भी नितिन नबीन जी के नेतृत्व में गुरुग्राम में इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

आज आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में देश की युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक है। कार्यक्रम में महान विचारक एवं युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से प्रेरणा लेते हुए युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के प्रति संकल्पबद्ध होने पर ज़ोर दिया गया।युवा भारत माता की सच्ची ताक़त हैं।अंत में विवेकानंद के प्रेरकवाक्य के साथ अपने लेख को विराम करूँगा “जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी। जिस दिन आपके सामने समस्या न आए आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं। खुद को कमजोर समझना ही सबसे बड़ा पाप है।”

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Author: Bharat Sarathi

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