एचबीओसीडब्ल्यू साइट बंद कर मजदूरों को सज़ा दे रही है सरकार: एआईयूटीयूसी

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1500 करोड़ घोटाले की आड़ में पंजीकरण, रिन्यूअल व हितलाभ रोके — हरिप्रकाश

सोनीपत | 8 जनवरी 2026 – एआईयूटीयूसी हरियाणा प्रदेश सचिव कॉमरेड हरिप्रकाश ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले कई महीनों से हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (HBOCW) की वेबसाइट बंद कर रखी गई है, जिससे हजारों निर्माण श्रमिक अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार घोटाले की जांच का बहाना बनाकर पूरी साइट ही बंद कर चुकी है, जबकि जांच साइट चालू रखते हुए भी की जा सकती थी। इसके चलते न तो नए श्रमिकों का पंजीकरण हो पा रहा है, न ही सदस्यता रिन्यूअल, और न ही हितलाभ के नए फार्म स्वीकार किए जा रहे हैं।

कॉमरेड हरिप्रकाश ने श्रम मंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब मंत्री स्वयं 1500 करोड़ रुपये के घोटाले की बात स्वीकार कर रहे हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और विभागीय अधिकारियों की बनती है। यह राशि निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए थी, जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। केवल बयान देकर मंत्री अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

उन्होंने कहा कि भवन निर्माण कारीगर मजदूर यूनियन हरियाणा ने बार-बार ज्ञापन देकर एचबीओसीडब्ल्यू में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन सरकार ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। पंजीकरण कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों की मनमानी और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली के कारण वास्तविक श्रमिकों को लगातार हितलाभों से वंचित किया गया।

कॉमरेड हरिप्रकाश ने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों का निर्माण कार्य और श्रमिकों से कोई सरोकार नहीं है, उनसे कार्य-स्लिप की तस्दीक कराना क्या भ्रष्टाचार को न्योता नहीं है? श्रमिकों को हितलाभ के नाम पर अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कटवाना, वास्तव में उन्हें लाभ से वंचित करने की साजिश है।

उन्होंने कहा कि पूरे साल काम न मिलने से निर्माण श्रमिक पहले ही बदहाली झेल रहे हैं, ऊपर से सरकारी आदेशों ने हितलाभ प्राप्त करना लगभग असंभव बना दिया है, जिससे भ्रष्टाचार का रास्ता स्वयं सरकार ने खोला।

मनरेगा पर बोलते हुए एआईयूटीयूसी नेता ने कहा कि नए कानून में ग्रामीण श्रमिकों से काम मांगने का अधिकार ही छीन लिया गया है। जहां जरूरत थी साल में 200 दिन काम और 800 रुपये दिहाड़ी की गारंटी देने की, वहीं सरकार ने काम की गारंटी समाप्त कर दी। केंद्र सरकार काम देने की जिम्मेदारी तो तय कर रही है, लेकिन मजदूरी का पूरा भुगतान राज्यों पर डाल दिया गया है, जो मजदूर विरोधी नीति का स्पष्ट उदाहरण है।

एआईयूटीयूसी हरियाणा प्रदेश कमेटी ने निर्माण मजदूरों और मनरेगा श्रमिकों से आह्वान किया कि वे अपनी जीवन से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ संगठित संघर्ष खड़ा करें और आगामी 12 फरवरी 2026 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेकर मेहनतकश जनता के साथ एकजुटता को मजबूत करें।

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Author: Bharat Sarathi

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