भिवाड़ी का ज़हरीला पानी “अब बर्दाश्त नहीं”?

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तो पिछले 10–22 सालों तक कौन करता रहा बर्दाश्त — वेदप्रकाश विद्रोही का राव इन्द्रजीत पर सीधा सवाल

रेवाडी/धारूहेड़ा | 8 जनवरी 2026 – भिवाड़ी से धारूहेड़ा की ओर आ रहे उद्योगों के गंदले व रसायनयुक्त प्रदूषित पानी के मामले में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से हुई बैठक के बाद गुरुग्राम सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री राव इन्द्रजीत सिंह द्वारा दिए गए बयान — “भिवाड़ी का गंदला पानी धारूहेड़ा में आना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” — पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने इस बयान को देर से जागी संवेदनशीलता करार देते हुए राव इन्द्रजीत सिंह से सीधे और असहज सवाल पूछे हैं। विद्रोही ने कहा, “अगर अब यह पानी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, तो यह भी बताया जाए कि पिछले 10 वर्षों से इसे कौन बर्दाश्त करता रहा?

उन्होंने याद दिलाया कि राव इन्द्रजीत सिंह पिछले 22 वर्षों से लगातार सांसद हैं और 2014 से केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं। साथ ही, पिछले 11 वर्षों से केंद्र और हरियाणा—दोनों जगह भाजपा की सरकार है। ऐसे में सवाल यह है कि
👉 इतने वर्षों तक इस गंभीर पर्यावरणीय संकट पर चुप्पी क्यों साधी गई?

20 गांवों को क्यों बनाया गया “प्रयोगशाला”?

वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि धारूहेड़ा कस्बे सहित आसपास के करीब 20 गांवों को वर्षों तक इस रसायनयुक्त पानी की मार झेलने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने पूछा, “क्या इन गांवों के लोगों का स्वास्थ्य, खेती और भूजल भाजपा सरकार की प्राथमिकता में नहीं था?”

नाला बनेगा… पर कब? और पानी जाएगा कहां?

विद्रोही ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के उस दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा जा रहा है कि हाईवे के साथ छह किलोमीटर लंबा नाला बनाकर इस गंदले पानी की निकासी की जाएगी। उन्होंने कहा, “यह दावा पिछले दो वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं हुआ। अब दिल्ली की बैठक में भी वही पुराना राग अलापा गया।”

उन्होंने इसे ‘घोषणा बनाम हकीकत’ का मामला बताते हुए अहम सवाल उठाया —
👉 निकाले गए रसायनयुक्त पानी को आखिर डाला कहां जाएगा?
👉 क्या उसे वास्तव में एसटीपी में शुद्ध किया जाएगा, या मसानी बैराज की तरह केवल काग़ज़ी शुद्धिकरण होगा?

मसानी बैराज: “शुद्ध पानी” या ज़हरीली सच्चाई?

विद्रोही ने मसानी बैराज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एसटीपी से छोड़ा जा रहा तथाकथित शुद्ध पानी वास्तव में भीषण बदबू और ज़हर फैला रहा है, जिससे आधा दर्जन से अधिक गांव त्रस्त हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि
रेवाड़ी शहर का सीवर वर्षों से मसानी बैराज में डाला जा रहा है, और इस पर भी राव इन्द्रजीत सिंह की मौन सहमति रही है।

भूजल ज़हर बना, जीवन संकट में

इस प्रदूषण के कारण निखरी, मसानी, डूंगरवास, खरखड़ा, खलियावास, तितरपुर खालसा, भटसाना सहित कई गांवों का भूजल स्तर बुरी तरह दूषित हो चुका है।

विद्रोही के अनुसार:

  • पानी पीने योग्य नहीं
  • खेती असंभव
  • भूजल में मैग्नीशियम, फ्लोराइड, आयरन और टीडीएस खतरनाक स्तर पर
  • मनुष्यों और पशुओं में गंभीर बीमारियां
  • खेतों में उगाया गया अनाज व सब्जियां तक खाने लायक नहीं
आख़िरी सवाल: जिम्मेदार कौन?

वेदप्रकाश विद्रोही ने दो टूक शब्दों में कहा, “भिवाड़ी से धारूहेड़ा और रेवाड़ी से मसानी बैराज तक फैले इस ज़हरीले प्रदूषण का जिम्मेदार कौन है?
क्या सिर्फ़ जुमले बदल देने से वर्षों की लापरवाही धुल जाएगी?”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई और जवाबदेही तय नहीं हुई, तो ग्रामीण भारत इसे जनआंदोलन का रूप देने से पीछे नहीं हटेगा।

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Author: Bharat Sarathi

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