जड़ी-बूटियों से निर्मित विशेष काढ़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा : कुलपति

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आयुष विश्वविद्यालय ने तैयार किया औषधीय काढ़ा,सर्दी-जुकाम से बचाएगा।

आयुर्वेदिक अस्पताल में रोगियों को रोजाना 30 एमएल मिलेगा।

कुरुक्षेत्र (प्रमोद कौशिक) 2 जनवरी : शीत ऋतु में खांसी, बुखार एवं प्रतिश्याय (जुकाम) जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र द्वारा विशेष औषधीय काढ़ा तैयार किया गया है। यह काढ़ा विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में आने वाले रोगियों को रोजाना 30 एमएल की मात्रा में वितरित किया जाएगा। आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान एवं कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचकर रोगियों को काढ़ा वितरित करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला तथा स्टेट आयुर्वेदिक फार्मेसी के प्रबंधक प्रो. रवि राज विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि काढ़ा आयुर्वेद की सबसे प्रभावी औषधि विधा है, जिससे आगे चलकर अन्य औषधियां, जैसे गोलियां, तैयार की जाती हैं। उन्होंने बताया कि जड़ी-बूटियों से निर्मित यह विशेष काढ़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है और अब आयुर्वेदिक अस्पताल में ऋतु के अनुसार काढ़ा वितरित किया जाएगा।

इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य आयुर्वेद को केवल शिक्षण तक सीमित न रखकर उसे जनसेवा से जोड़ना है। शीत ऋतु में मौसमी रोगों से बचाव के लिए यह औषधीय काढ़ा आमजन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार की जनहितकारी आयुर्वेदिक पहल निरंतर जारी रखेगा।

इस अवसर पर आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने कहा कि शीत ऋतु में खांसी, बुखार एवं प्रतिश्याय (जुकाम) जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में यह औषधीय काढ़ा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ श्वसन तंत्र को मजबूत करता है। काढ़े में प्रयुक्त सभी औषधियां आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित हैं और चिकित्सकीय दृष्टि से सुरक्षित हैं। रोगियों को इसका नियमित सेवन करने से मौसमी बीमारियों से बचाव में विशेष लाभ मिलेगा।

रोजाना 3 लीटर तैयार होगा औषधीय काढ़ा: प्रो. रवि राज।

रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के प्रोफेसर एवं स्टेट आयुर्वेदिक फार्मेसी के प्रबंधक डॉ. रवि राज ने बताया कि शीत ऋतु को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन लगभग 3 लीटर औषधीय काढ़ा तैयार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक रोगियों को इसका लाभ मिल सके। यह काढ़ा लेमन ग्रास, तुलसी, गिलोय, दालचीनी एवं काली मिर्च जैसी चयनित औषधीय जड़ी-बूटियों से वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक विधि से तैयार किया जा रहा है। फार्मेसी स्तर पर काढ़े की गुणवत्ता एवं शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि रोगियों को सुरक्षित और प्रभावी औषधि उपलब्ध कराई जा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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