गुरुग्राम – हरियाणा की दो राज्यसभा सीटें मार्च–अप्रैल 2026 में खाली होनी हैं, लेकिन सत्ता की असली लड़ाई नए साल से पहले ही शुरू हो चुकी है। ऊपर से देखने पर यह चुनाव विधायकों के संख्या बल का मामला लगता है, पर असल में यह राजनीतिक अनुशासन बनाम राजनीतिक अव्यवस्था की टक्कर है। भाजपा इस चुनाव को केवल एक सीट नहीं, बल्कि कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत को परखने का अवसर मानकर चल रही है।
भाजपा की पहली सीट सुरक्षित है—यह लगभग तय है। असली सवाल दूसरी सीट का है, जो गणितीय तौर पर कांग्रेस के खाते में जाती दिखती है। लेकिन भाजपा का संदेश साफ है: कांग्रेस अगर खुद को संभाल नहीं पाई, तो यह सीट भी हाथ से जा सकती है। इसी सोच से जन्म ले चुका है ‘ऑपरेशन सेकेंड सीट’।
कांग्रेस की कमजोरी, भाजपा की सबसे बड़ी ताकत
हरियाणा कांग्रेस आज भी एकजुट राजनीतिक शक्ति के रूप में खड़ी नहीं दिखती। गुटों में बंटी पार्टी, नेतृत्व को लेकर असमंजस और भविष्य की अनिश्चितता—ये सब भाजपा के लिए किसी हथियार से कम नहीं हैं। भाजपा को न तो कांग्रेस पर हमला करने की जरूरत है और न ही सार्वजनिक आरोप लगाने की। कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान ही भाजपा के लिए सबसे कारगर रणनीति बन चुकी है।
लॉबिंग: दबाव नहीं, सटीक वार
भाजपा इस बार पारंपरिक ‘तोड़-फोड़’ की छवि से खुद को अलग रखना चाहती है। यहां न खुले ऑफर हैं, न सार्वजनिक बयानबाज़ी। लॉबिंग व्यक्तिगत बातचीत, पुराने राजनीतिक रिश्तों और भविष्य के संकेतों तक सीमित है। यही वजह है कि सियासी हलकों में हलचल तो है, लेकिन शोर नहीं।
उम्मीदवार नहीं, माहौल निर्णायक
भाजपा के भीतर कई नाम चर्चा में हैं—कुलदीप बिश्नोई से लेकर असीम गोयल तक। लेकिन पार्टी जानती है कि दूसरी सीट का फैसला उम्मीदवार के चेहरे से नहीं, बल्कि उस माहौल से होगा जिसमें मतदान होगा। अगर कांग्रेस एकजुट रही, तो भाजपा को संतोष करना पड़ेगा। अगर कांग्रेस में दरार पड़ी, तो भाजपा बाज़ी पलटने को तैयार बैठी है।
राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए चेतावनी
यह चुनाव कांग्रेस के लिए सिर्फ एक सीट बचाने की लड़ाई नहीं है। यह उसकी संगठनात्मक मजबूती की अग्निपरीक्षा है। अगर पार्टी अपने विधायकों को एकजुट नहीं रख पाई, तो संदेश साफ जाएगा कि कांग्रेस अभी भी सत्ता की राजनीति के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
भाजपा का दांव बड़ा, लेकिन सधा हुआ
भाजपा जानती है कि दूसरी सीट जीतना जोखिम भरा है, लेकिन यह जोखिम सोच-समझकर उठाया गया है। सफल हुआ तो भाजपा यह साबित कर देगी कि वह केवल चुनाव जीतने वाली पार्टी नहीं, बल्कि विपक्ष की कमजोर नस पकड़ने में माहिर राजनीतिक मशीन है।
निष्कर्ष
हरियाणा की राज्यसभा सीटें अब सिर्फ संसद के ऊपरी सदन की संख्या नहीं तय करेंगी। यह चुनाव बताएगा कि
- भाजपा की रणनीति कितनी धारदार है, और
- कांग्रेस अपनी ही कमजोरियों से पार पा पाती है या नहीं।
अगर कांग्रेस फिसली, तो भाजपा चूकेगी नहीं। यही इस चुनाव की सबसे बड़ी सच्चाई है।







