गीत–संगीत, कविता और रागिनियों के साथ वानप्रस्थ में नववर्ष उत्सव

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

वरिष्ठ नागरिकों ने सुरों में पिरोया नववर्ष 2026, वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब में सांस्कृतिक उल्लास

हिसार। वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब में नववर्ष 2026 का स्वागत अत्यंत हर्षोल्लास, सांस्कृतिक गरिमा और आत्मीय वातावरण में किया गया। गीत, लोकगीत, रागिनी, कविता और ग़ज़लों से सजी इस सांस्कृतिक संध्या ने यह सिद्ध कर दिया कि जीवन के वानप्रस्थ चरण में भी रचनात्मकता, उल्लास और ऊर्जा अपनी पूर्ण आभा के साथ जीवंत रहती है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंच संचालिका डॉ. दवीना अमर ठकराल द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। उन्होंने नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नववर्ष आत्ममंथन, नवचिंतन, नवसंकल्प और आत्मनिर्माण का पावन अवसर होता है। यह हमें बीते वर्ष की सीखों को आत्मसात कर सकारात्मक दृष्टि के साथ भविष्य की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि नववर्ष 2026 सभी के जीवन में नवीन ऊर्जा, दृढ़ संकल्प, स्वास्थ्य, सौहार्द और समृद्धि का संचार करे।

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत डॉ. कमलेश कुकड़ेजा के भावपूर्ण भजन “बरसा दाता सुख बरसा, आँगन-आँगन सुख बरसा” से हुई। इसके पश्चात श्री धर्मपाल ढुल ने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से नववर्ष के प्रति नए संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया।

कार्यक्रम में प्रस्तुतियों की सशक्त श्रृंखला ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्रीमती वीना अग्रवाल ने “किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार” गाकर भावनाओं को छू लिया।
डॉ. आर. एस. हुड्डा एवं डॉ. कृष्णा हुड्डा ने युगल गीत “ओ सनम तेरे हो गए हम” प्रस्तुत किया।
श्री योगेश सुनेजा ने “चले थे साथ मिलके, चलेंगे साथ मिलकर” से खूब तालियाँ बटोरीं।

हरियाणवी रंग को मंच पर सशक्त रूप देते हुए डॉ. अजीत कुंडू ने रागिनी “सपने के मैं मेरे पिया…” की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
डॉ. एस. एस. धवन ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में
“संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है”
पढ़कर श्रोताओं से भरपूर दाद पाई।

डॉ. दवीना अमर ठकराल ने अपनी स्वरचित ग़ज़ल
“कभी दिल की भी सुन लिया कीजिए,
मौन को न यूँ अनसुना किया कीजिए”

प्रस्तुत कर सभी को चकित कर दिया।

डॉ. सुनीता सुनेजा ने “मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी-कभी” से मंच को भावुक कर दिया।
डॉ. दीप पूनिया ने ठेठ हरियाणवी लोकगीत
“छोटे-छोटे घूंघरुआँ का झरनाटा…”
से ग्रामीण संस्कृति की मिठास घोली, वहीं
डॉ. एम. एस. राणा की रचना
“क्यों मुंह लटकाया ईस्सा…”
ने खूब वाहवाही लूटी।

श्रीमती राज गर्ग की कविता तथा डॉ. अजीत व डॉ. कमलेश कुकड़ेजा का युगल गीत “तुम्हीं तो मेरी पूजा हो” विशेष रूप से सराहा गया।
डॉ. सुदेश गांधी एवं श्री एम. एम. गांधी ने “तू मेरा चाँद, मैं तेरी चाँदनी” प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
श्री एस. पी. चौधरी ने स्वरचित कविता से नववर्ष का स्वागत किया।

कार्यक्रम के समापन की ओर बढ़ते हुए श्री अजीत सिंह ने सभी के साथ “बल्ले-बल्ले नया साल आया है” गाकर पूरे वातावरण को उल्लास से भर दिया।

इस अवसर पर वानप्रस्थ के महासचिव डॉ. जे. के. डांग का संदेश पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने सभी सदस्यों को नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए वानप्रस्थ को सेवा, संवेदना और सहयोग का सशक्त परिवार बताया तथा वर्ष 2026 में संस्था के नए आयाम स्थापित करने का विश्वास व्यक्त किया।

संस्था के प्रधान डॉ. एस. के. अग्रवाल ने पिछले वर्ष की उपलब्धियों की सराहना करते हुए भव्य, सुव्यवस्थित और प्रेरणादायी कार्यक्रम के लिए आयोजकों एवं मंच संचालन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

नववर्ष के शुभ अवसर पर यह संकल्प भी व्यक्त किया गया कि आने वाला वर्ष और अधिक समर्पण, सृजनशीलता और कर्मठता के साथ संस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। सभी सदस्यों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में जलपान का आनंद लिया।

कार्यक्रम के अंत में मंच संचालिका डॉ. दवीना अमर ठकराल ने नववर्ष के भावपूर्ण शब्दों से समापन किया—

“केवल एक दिन नहीं, प्रतिदिन, प्रतिक्षण हो नववर्ष का अभिनंदन,
हर श्वास में हो नव उमंग, हर कदम पर नव संकल्प का स्पंदन।”

कार्यक्रम पूर्णतः सौहार्द, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें